‘छेड़छाड़ और धक्का-मुक्की’: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई महिलाओं ने पुलिस पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने पुलिस पर यौन उत्पीड़न, मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं. 'स्क्रोल' की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हिरासत में लेते समय पुरुष पुलिसकर्मियों ने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ, जबकि महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें बालों से घसीटा और बसों में धकेला.

बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान नेहा बोरा से कथित दुर्व्यवहार

10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग और प्रतिबंधों के कारण प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र नहीं हो सके. इसके बाद अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दिल्ली हाट में प्रदर्शन करने की घोषणा की. दक्षिण दिल्ली के खुले बाजार की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड के पास पहुंचने पर बोरा ने उसे पार करने की कोशिश की.

आइसा की सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अंजलि के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने बोरा को रोकने के लिए दौड़ते हुए उनके सीने पर हाथ रख दिया. घटना का वीडियो भी सामने आया. अंजलि ने आरोप लगाया कि उस समय वहां महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं.

‘पुरुष पुलिसकर्मी ने गलत तरीके से छुआ’

11 अक्टूबर को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के 22 सदस्यों ने कनॉट प्लेस में एक दिन पहले हुई कथित पुलिस बर्बरता के विरोध में प्रदर्शन किया. करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को जबरन बस में चढ़ाने लगी.

प्रदर्शनकारी जूलिया ने स्क्रॉल को बताया कि महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें बालों से घसीटा और गला पकड़कर धकेला. उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह बस में चढ़ने का विरोध कर रही थीं, तब एक पुरुष पुलिसकर्मी ने उनके स्तनों को गलत तरीके से छुआ और उन्हें बस में धकेल दिया. जूलिया के मुताबिक, उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने उनकी बात अनसुनी कर दी.

रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले भी महिला प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों पर निजी अंगों को निशाना बनाकर मारपीट करने के आरोप लगाए थे. जुलाई में पत्रकार तनुश्री पांडे ने भी एक पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. वहीं, अक्टूबर की शुरुआत में तीन पत्रकारों ने प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. संबंधित अधिकारी ने पत्रकारों पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और एसआईआर का मुद्दा

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, अक्टूबर में हुए विरोध प्रदर्शनों में जुलाई के मुकाबले अधिक महिलाएं शामिल हुईं. उनका कहना है कि दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू हुए ‘रीक्लेम द नाइट’ अभियान ने भी इस लामबंदी को गति दी.

अंजलि ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से महिलाओं के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका ने भी उन्हें विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया. रिपोर्ट में झारखंड के पांच विधानसभा क्षेत्रों के एक विश्लेषण का हवाला दिया गया है, जिसमें मतदाता सूची में ‘अनमैप्ड’ चिह्नित लोगों में संदिग्ध मानी गई महिलाओं का अनुपात 25 से 47.8 प्रतिशत के बीच था.

महिलाओं की गिरफ्तारी को लेकर कानून पर सवाल

प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने वाली वकील दिशा वाडेकर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 43 के अनुसार, असाधारण परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. वाडेकर के मुताबिक, महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया.

वकील ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कथित पुलिस दुर्व्यवहार के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई. 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने पुलिस पर अनुपातहीन बल प्रयोग, अवैध हिरासत और महिला प्रदर्शनकारियों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

'स्क्रोल' ने इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस से प्रतिक्रिया मांगी थी. खबर प्रकाशित होने तक पुलिस का जवाब नहीं आया था. प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि उनके साथ होने वाला दुर्व्यवहार उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरने से रोकने की कोशिश है. हालांकि, उन्होंने चोटों और उत्पीड़न के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है.

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