मागा का मोहभंग: ट्रम्प से टकराने वाले टकर कार्लसन

‘दि न्यू यॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक,अमेरिकी मीडिया के सबसे विवादास्पद और प्रभावशाली चेहरों में से एक, टकर कार्लसन, आजकल उस मोड़ पर खड़े हैं जहाँ उनकी ज़िंदगी के सबसे बड़े राजनीतिक फ़ैसलों का हिसाब हो रहा है. एक वक़्त था जब वे डोनाल्ड ट्रम्प के सबसे मुखर समर्थकों में गिने जाते थे. आज वही कार्लसन ट्रम्प को अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी भूलों में से एक मानते हैं.

फ़ॉक्स न्यूज़ के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले एंकर के रूप में उनका करियर एक दशक से ज़्यादा समय तक अमेरिकी राइट-विंग मीडिया की रीढ़ रहा. 2023 में फ़ॉक्स से निकाले जाने के बाद, उन्होंने अपना स्वतंत्र पॉडकास्ट और टकर कार्लसन नेटवर्क शुरू किया, जो आज लाखों लोगों तक पहुँचता है. लेकिन 2026 की शुरुआत में, जब अमेरिका और इज़्राइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए, तो कार्लसन के सुर पूरी तरह बदल गए.

ट्रम्प से टूटन

फ़रवरी 2026 में ट्रम्प प्रशासन ने इज़्राइल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए. यही वह पल था जब कार्लसन और ट्रम्प के बीच की दरार स्थायी खाई में बदल गई. कार्लसन ने अपने न्यूज़लेटर में लिखा कि अमेरिका को इज़्राइल को "छोड़ देना चाहिए" और उन्हें अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ने देनी चाहिए. उन्होंने कहा: "अगर इज़्राइल यह युद्ध लड़ना चाहता है तो उसे हक़ है, लेकिन अमेरिका के समर्थन से नहीं."

ट्रम्प ने जवाब में कार्लसन को "कूकी" यानी "सनकी" और "लो आई.क्यू." यानी "कम बुद्धि वाला" कहा. लेकिन कार्लसन नहीं रुके. अप्रैल 2026 में अपने पॉडकास्ट पर भाई बकले के साथ बातचीत में उन्होंने जो कुछ कहा, वह अमेरिकी राजनीति में एक दुर्लभ सार्वजनिक आत्म-स्वीकृति था. उन्होंने कहा कि वे ट्रम्प को चुनाव जिताने में मदद करने के लिए "टॉर्मेंटेड" यानी मानसिक रूप से पीड़ित हैं, और उन्होंने माफ़ी माँगी: "मुझे खेद है कि मैंने लोगों को गुमराह किया."

कार्लसन ने यहाँ तक कह दिया: "हम सब दिखावा कर रहे हैं कि हमें बहुत कुछ मिला, क्योंकि यह स्वीकार करना कि यह एक आपदा रही है, बहुत कठिन है. लेकिन सच यही है. ट्रम्प का कोई सकारात्मक पहलू नहीं बचा."

इज़्राइल, नेतन्याहू और एआईपीएसी पर निशाना

कार्लसन की आलोचना सिर्फ़ ट्रम्प तक सीमित नहीं है. उनके निशाने पर इज़्राइल, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राजनीति में इज़्राइली लॉबी आईपैक का ज़बरदस्त प्रभाव भी है. न्यू यॉर्क टाइम्स को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ट्रम्प को इज़्राइल ने "बंधक" बना रखा था. उनके शब्द थे: "नेतन्याहू एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनसे ट्रम्प यह नहीं कह सके. 'शांत हो जाओ वरना हम तुम्हारी फ़ंडिंग बंद कर देंगे.'"

उन्होंने युद्ध के लिए दबाव बनाने वालों में रूपर्ट मर्डोक, मिरियम एडेलसन, सीन हैनिटी और मार्क लेविन जैसे इज़्राइल-समर्थक हस्तियों का नाम लिया. उनके अनुसार: "वे सब ट्रम्प को बता रहे थे कि तुम इज़्राइल को बचाओगे और उसे छुटकारा दिलाओगे."

आईपैक के बारे में उनकी टिप्पणी और भी तीखी थी. कार्लसन ने कहा: "अमेरिकी कांग्रेस के लगभग 500 सदस्य आईपैक से पैसे लेते हैं." यह बयान अमेरिकी राजनीति में एक वर्जित सच्चाई को खुलेआम कहने जैसा था. कार्लसन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे यहूदी-विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिकी संप्रभुता और "अमेरिका फ़र्स्ट" नीति के पक्षधर हैं.

उन्होंने कहा कि ट्रम्प उस हर चीज़ के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं जिसका वादा उन्होंने चुनाव में किया था: "उन्होंने उन चीज़ों के ख़िलाफ़ प्रचार किया था जो वे अब कर रहे हैं."

ईरान युद्ध के सवाल

कार्लसन का सबसे बड़ा सरोकार ईरान युद्ध की नैतिकता और रणनीतिक औचित्य को लेकर है. उनके अनुसार ईरान को परमाणु हथियार मिलने का ख़तरा निराधार था और यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं और सैनिकों के लिए एक गहरा विश्वासघात है. न्यू यॉर्क टाइम्स साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प इस युद्ध में एक "स्वतंत्र निर्णय-निर्माता" नहीं, बल्कि एक "बंधक" की तरह थे. यह सामान्य निर्णय-प्रक्रिया नहीं थी.

कार्लसन ने चेतावनी दी थी कि ईरान युद्ध में अमेरिका की सीधी भागीदारी से हज़ारों अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है और यह ट्रम्प की राजनीतिक विरासत को नष्ट कर देगा. सी.एन.एन. के एक विश्लेषण के अनुसार, उनकी आलोचना ने ट्रम्प समर्थकों में से उन लोगों को युद्ध-विरोध की दिशा में खुलकर बोलने की हिम्मत दी जो पहले चुप थे. एक सी.एन.एन. सर्वेक्षण में 28% ट्रम्प मतदाताओं ने ईरान नीति पर असहमति जताई.

मागा में दरार और भविष्य की राजनीति

अमेरिकी राइट इस वक़्त इज़्राइल के मुद्दे पर एक गृहयुद्ध जैसी स्थिति में है. कार्लसन के साथ-साथ कैंडेस ओवेन्स और मार्जोरी टेलर ग्रीन जैसी हस्तियाँ भी ट्रम्प की इज़्राइल-समर्थक नीति से नाराज़ हैं. सवाल यह है कि क्या मागा एक व्यक्ति यानी ट्रम्प की पार्टी है, या एक विचारधारा की?

कार्लसन स्पष्ट रूप से ख़ुद को उस विचारधारा का रखवाला मानते हैं जो अमेरिका को विदेशी युद्धों और लॉबी के प्रभाव से मुक्त देखना चाहती है. 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं.

टकर कार्लसन आज अमेरिकी राजनीति में एक ऐसे मुकाम पर हैं जहाँ से वापसी मुश्किल है. उन्होंने जो सवाल उठाए हैं — ईरान युद्ध की ज़रूरत क्या थी? आईपैक का प्रभाव कितना गहरा है? क्या अमेरिका किसी और देश की जंग लड़ रहा है? — ये सवाल आसानी से दबाए नहीं जा सकते. चाहे उनके समर्थक हों या आलोचक, यह मानना होगा कि एक बार की मुख्यधारा की आवाज़ आज सत्ता के सबसे असुविधाजनक प्रश्न पूछ रही है.

Previous
Previous

आकार पटेल | ओडिशा में ईसाइयों के ख़िलाफ़ अत्याचार

Next
Next

बंगाल में चुनाव से जुड़े अफसर एक के बाद एक पुरस्कृत: अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी अग्रवाल, मुख्य सचिव होंगे