मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में एएफएसपीए छह महीने के लिए बढ़ा

मणिपुर के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में ‘अशांत क्षेत्र’ का दर्जा जारी

‘पीटीआई’ के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम यानी एएफएसपीए को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. यह फैसला इन इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है.

मणिपुर में 13 थाना क्षेत्र एएफएसपीए से बाहर

मणिपुर में 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक पूरे राज्य को ‘अशांत क्षेत्र’ माना जाएगा. हालांकि, पांच घाटी जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है. इनमें इम्फाल, लांफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगांग, इरिलबुंग, थौबल, बिष्णुपुर, नंबोल और काकचिंग शामिल हैं.

मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है. इसी पृष्ठभूमि में नवंबर 2024 में छह पुलिस थाना क्षेत्रों में एएफएसपीए फिर लागू किया गया था. फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जिसे फरवरी 2026 में हटा दिया गया.

इससे पहले अप्रैल 2022 से अप्रैल 2023 के बीच राज्य सरकार ने घाटी के सभी पुलिस थाना क्षेत्रों से एएफएसपीए हटा दिया था. उस समय सरकार ने सुरक्षा स्थिति में सुधार और लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ने को इसका आधार बताया था. इम्फाल नगर क्षेत्र से एएफएसपीए 2004 में ही हटा दिया गया था.

हालांकि, मणिपुर के पहाड़ी जिलों में ‘अशांत क्षेत्र’ का दर्जा पिछले करीब तीन दशकों से समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है. इस संबंध में पिछली अधिसूचना मार्च 2026 में जारी हुई थी.

नगालैंड के कई जिलों में भी लागू रहेगा

नगालैंड में एएफएसपीए को नौ जिलों में छह महीने के लिए बढ़ाया गया है. इनमें दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी शामिल हैं.

इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में भी यह कानून लागू रहेगा.

अरुणाचल प्रदेश के तीन जिले और तीन थाना क्षेत्र

अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है. इसके अलावा असम की सीमा से लगे नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम पुलिस थाना क्षेत्रों में भी एएफएसपीए अगले छह महीने तक लागू रहेगा.

एएफएसपीए क्या है?

सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम, 1958 के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित इलाकों में तैनात सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं. इनमें बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी तथा कानून के उल्लंघन की स्थिति में बल प्रयोग करने की शक्तियां शामिल हैं.

कानून के तहत संबंधित सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ मुकदमा या कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है.

मणिपुर में एएफएसपीए 1981 से लागू है. इसके दायरे को समय-समय पर अलग-अलग इलाकों से हटाया या बढ़ाया जाता रहा है.

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