मध्य प्रदेश के देवास जिले में रविवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई. अवैध शराब गुजरात ले जा रहे एक संदिग्ध ट्रक को रोकने के दौरान उसके पिछले पहिये के नीचे आने से खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर ट्रक को जब्त कर लिया है, जिसमें से 800 लीटर से अधिक शराब बरामद हुई है. यह घटना राज्य में जहरीली शराब से हाल ही में हुई मौतों के बाद अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के दौरान घटी है.
आनंद मोहन जे के अनुसार, 2007 बैच के इंस्पेक्टर दिलीप पुरी को सूचना मिली थी कि हरदा से इंदौर के रास्ते गुजरात अवैध शराब ले जाई जा रही है. इसके आधार पर देवास के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने खातेगांव, कन्नौद और नेमावर के थाना प्रभारियों के नेतृत्व में पांच से अधिक विशेष टीमें गठित की थीं. हाइवे पर कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहन की तलाश की जा रही थी.
पुलिस के अनुसार, हरदा-नेमावर हाइवे पर जब ट्रक चालक पानी पीने के लिए रुका, तो थाना प्रभारी पुरी उसे पकड़ने मौके पर पहुंच गए. चालक को नीचे उतरने के लिए कहने पर दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई. इसके बाद आरोपी ने भागने की नीयत से ट्रक तेजी से आगे बढ़ा दिया, जिससे पुरी वाहन की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह शराब हरदा जिले के टिमरनी इलाके की एक दुकान से लाई गई थी. पुलिस इसके मुख्य स्रोत और पूरे सप्लाई नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है.
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना पर दुख जताते हुए इसे "व्यवस्था के मुंह पर तमाचा" करार दिया और अपराधियों के बढ़ते हौसलों पर सवाल उठाए. वहीं, स्थानीय भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि पुलिस अवैध कारोबार पर बड़े पैमाने पर शिकंजा कस रही है और इस घटना में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
गौरतलब है कि देवास जिले में सितंबर और अक्टूबर के दौरान जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की संदिग्ध मौतें हुई थीं, जिसके बाद प्रशासन सख्त एक्शन मोड में है. लापरवाही के आरोप में पूर्व कलेक्टर और एसपी का तबादला किया जा चुका है, जबकि तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है.

