राहुल गांधी के धरने के बाद, दिल्ली विरोध प्रदर्शन में पेलेट गन के इस्तेमाल पर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर सात घंटे तक दिए गए धरने के बाद, पुलिस ने 20 मार्च को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन (छर्रे वाली बंदूक) के इस्तेमाल के मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है.

श्रीमानसी कौशिक की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी धरना स्थल पर तब बैठे, जब प्रदर्शन के दौरान पेलेट लगने से अपनी एक आंख की रोशनी गंवाने वाले 19 वर्षीय साहिल लोचब ने बताया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था. कांग्रेस नेता अपनी बहन व वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा तथा अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे और पुलिस के झुकने के बाद उन्होंने धरना समाप्त किया.

लोचब ने बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद उन्होंने सात पन्नों की शिकायत लिखी थी और एफआईआर दर्ज कराने के लिए कई पुलिस स्टेशनों के चक्कर लगाए. उन्होंने कहा, "लेकिन पुलिस ने मेरी शिकायत को स्वीकार नहीं किया. मैं पहले कॉनॉट प्लेस, फिर मंदिर मार्ग, संसद मार्ग और यहां तक कि क्राइम ब्रांच में भी एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ."

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के छात्र लोचब ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनके सीने, पीठ, बाहों और चेहरे पर पेलेट की कई चोटें आई थीं. उनकी दाहिनी आंख में गंभीर चोट लगी थी; छर्रे उनके शरीर के अंदर चले गए थे और उनमें से कई को निकाला नहीं जा सका. उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा, "मेरे मेडिकल दस्तावेज़ दिखाते हैं कि मेरे शरीर में 200 से अधिक छर्रे मौजूद हैं. डॉक्टरों ने मुझे बताया है कि मेरी आंखों की रोशनी वापस आने की संभावना एक प्रतिशत से भी कम है."

शुक्रवार (21 अगस्त 2026) को राहुल गांधी, लोचब और उनकी मां के साथ पहले मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन और फिर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन गए. उन्होंने डीसीपी कार्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा, "साहिल और उनका परिवार अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दर-दर भटक रहा है. पुलिस ऐसा करने से इनकार क्यों कर रही है?"

शाम को भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(1) (खतरनाक हथियारों का उपयोग करके स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और धारा 125 के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

राहुल गांधी ने कहा, "उन्हें एफआईआर दर्ज करने में इतना समय लग गया. उनके घायल होने के बाद से मार्च को एक महीना हो गया है. बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया. इसे कौन रोक रहा था? अंतिम आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय से आया है. अब हम सभी जानते हैं कि एक एफआईआर दर्ज करने के लिए भी गृह मंत्री को आदेश देना पड़ता है."

राहुल गांधी ने आगे कहा, "अगर देश की राजधानी के केंद्र में एक एफआईआर दर्ज कराने में इतना समय लगता है, तो किसी छोटे गांव या शहर में क्या होता होगा?"

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