ओडिशा के भद्रक में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए सामूहिक आवेदन, जांच के बजाय दोबारा सत्यापन के निर्देश
‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ में आयुषी कर की रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा के भद्रक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बूथ-स्तरीय एजेंटों ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए. रिपोर्ट में दस्तावेजों, बूथ-स्तरीय अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार के आधार पर इन आवेदनों को संगठित प्रयास बताया गया है. शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन ने संबंधित लोगों के खिलाफ जांच शुरू करने के बजाय चिह्नित मतदाताओं के दोबारा सत्यापन के निर्देश दिए.
30 से अधिक बूथों पर आवेदन
भद्रक में चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान भाजपा के बूथ-स्तरीय एजेंटों ने सैकड़ों मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करते हुए फॉर्म-7 जमा किए. रिपोर्ट के अनुसार, बूथ-स्तरीय अधिकारियों और बीजू जनता दल (बीजद) के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि कम से कम 30 बूथों पर ऐसे आवेदन दिए गए, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 90 प्रतिशत से अधिक थी.
प्रत्येक बूथ पर सौ से अधिक नाम हटाने के अनुरोध प्राप्त होने की बात कही गई. भद्रक में एक बूथ पर 400 से 1,100 तक मतदाता हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.
फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा एजेंटों द्वारा जमा किए गए कई फॉर्म कंप्यूटर पर पहले से भरे हुए थे. इनमें संबंधित मतदाता का नाम और पता पहले से दर्ज था, जबकि आवेदन करने वालों ने अपने नाम, मोबाइल नंबर और हस्ताक्षर भरे थे. रिपोर्ट में दो एजेंटों के नाम से जमा आवेदनों की जांच और उनमें से एक के भाजपा सदस्य होने की पुष्टि का भी उल्लेख है.
शिकायतों के बावजूद दोबारा सत्यापन
बीजद और नाम हटाने के लिए चिह्नित किए गए कई मतदाताओं ने जिला प्रशासन से औपचारिक शिकायत की. पार्टी ने आवेदन प्रक्रिया को मुस्लिम बहुल बूथों से मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने का सुनियोजित प्रयास बताया. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने शिकायतों पर आपराधिक जांच शुरू करने के बजाय बूथ-स्तरीय अधिकारियों को संबंधित मतदाताओं का दोबारा सत्यापन करने को कहा.
भद्रक में 17 बूथों की निगरानी करने वाले एक वरिष्ठ बूथ-स्तरीय अधिकारी, जिनका नाम अनुरोध पर बदलकर उमर उस्मान रखा गया है, ने बताया कि उप-कलेक्टर कार्यालय ने 30 से अधिक बूथ अधिकारियों को बुलाकर प्रत्येक को सत्यापन के लिए 100 से 200 आवेदन दिए. उनके अनुसार, इन आवेदनों में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया था.
आवेदनकर्ताओं ने दावा किया था कि संबंधित मतदाता स्थानांतरित हो चुके हैं, उनकी मृत्यु हो चुकी है या उनके पास एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र हैं. उस्मान के मुताबिक, बूथ अधिकारियों ने इन दावों को गलत बताया, क्योंकि वे कुछ दिन पहले ही मतदाताओं का सत्यापन कर चुके थे. इसके बावजूद प्रशासन ने दोबारा जांच और रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए.
उस्मान, उनके दो बेटों और बेटी के नाम भी हटाने के लिए चिह्नित किए गए थे. उनके अधीन दस बूथों में कुल 1,150 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई. उस्मान ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि चिह्नित मुस्लिम मतदाता वैध मतदाता थे.
नियम और कार्रवाई का सवाल
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को बूथ-स्तरीय एजेंट के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में सहायता मिले. हालांकि, गलत जानकारी देकर नाम हटाने के आवेदन देना दंडनीय अपराध है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत इसके लिए एक साल तक की सजा हो सकती है.
आयोग के नियमों में एक व्यक्ति द्वारा फॉर्म-7 जमा करने की कुल संख्या की सीमा नहीं है, लेकिन बूथ-स्तरीय एजेंटों के लिए प्रतिदिन अधिकतम दस आवेदन जमा करने की सीमा है. पुनरीक्षण अवधि में 30 से अधिक आवेदन जमा होने पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी द्वारा अतिरिक्त सत्यापन किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट के अनुसार, भद्रक में शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक के पास पांच प्राथमिकी दर्ज कराईं. जिला प्रशासन, ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग को भेजे गए सवालों का रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था.
भद्रक नगरपालिका की अध्यक्ष गुलमाकी दलवजी हबीब ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से फॉर्म-7 के दुरुपयोग की जांच तथा कथित फर्जी आवेदनों को रद्द करने की मांग की. उन्होंने संबंधित आवेदनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी अपील की.
रिपोर्ट इस घटना को बिहार, राजस्थान, गुजरात, असम और उत्तराखंड में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े पहले के आरोपों के संदर्भ में रखती है. ओडिशा में एसआईआर का तीसरा और अंतिम चरण जारी है. भद्रक विधानसभा सीट पिछले चुनाव में भाजपा ने 16,068 मतों के अंतर से जीती थी, जबकि उससे पहले बीजद ने 33,389 मतों से जीत दर्ज की थी.

