परिसीमन की राजनीति:उत्तर-दक्षिण असंतुलन और कंपनसेशन पॉलिटिक्स
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में अर्थशास्त्री रथिन रॉय से परिसीमन, उत्तर बनाम दक्षिण का संतुलन, और बदलती राजनीति पर गहन चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर भारत में “वन पर्सन, वन वोट” का सिद्धांत व्यवहार में क्यों लागू नहीं है.1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का जो फिक्सेशन हुआ, उसने आज एक ऐसी स्थिति बना दी है जहां जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के बीच असंतुलन स्पष्ट दिखता है.
लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए यह हार ज़रूरी थी. इसे न केवल सरकार की हार, बल्कि विपक्ष की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए. इसने विपक्ष में आत्मविश्वास बहाल किया है. जनता के बीच भी अब विपक्ष के नज़रिए को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है. नागरिकों ने इस बार संसदीय बहसों को बहुत ध्यान से देखा और सुना. वे यह समझने के लिए "मुख्यधारा" के मीडिया से इतर देख रहे हैं कि सरकार कहाँ और कैसे धोखे का सहारा लेती है. ऐसा प्रतीत होता है कि जनता सरकार के इस दावे को स्वीकार करने वाली नहीं है कि वह केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए कानून ला रही थी और उसे एक "स्त्री-द्वेषी" विपक्ष ने रोक दिया.

