मोदी के भाषण और आचार संहिता पर विवाद, 700 नागरिकों की चिट्ठी से बढ़ी बहस, “टॉकिंग न्यूज़” में विस्तृत चर्चा
700 से अधिक नागरिकों, सेवानिवृत्त नौकरशाहों और एक्टिविस्टों ने इलेक्शन कमीशन को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई. पत्र में कहा गया कि जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, तब सरकारी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों पर हमला करना आचार संहिता का उल्लंघन है. साथ ही यह मांग भी की गई कि चुनाव आयोग इस मामले में कार्रवाई करे, विपक्षी दलों को भी सरकारी मीडिया पर समान अवसर मिले और चुनाव खत्म होने तक ऐसे डिजिटल कंटेंट को हटाया जाए. हालांकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि इसमें कोई गलत काम नहीं किया गया.
लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए यह हार ज़रूरी थी. इसे न केवल सरकार की हार, बल्कि विपक्ष की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए. इसने विपक्ष में आत्मविश्वास बहाल किया है. जनता के बीच भी अब विपक्ष के नज़रिए को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है. नागरिकों ने इस बार संसदीय बहसों को बहुत ध्यान से देखा और सुना. वे यह समझने के लिए "मुख्यधारा" के मीडिया से इतर देख रहे हैं कि सरकार कहाँ और कैसे धोखे का सहारा लेती है. ऐसा प्रतीत होता है कि जनता सरकार के इस दावे को स्वीकार करने वाली नहीं है कि वह केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए कानून ला रही थी और उसे एक "स्त्री-द्वेषी" विपक्ष ने रोक दिया.

