‘मुझे वह कानून दिखाएं जो उन्हें छूट देता है...’: प्रियांक खड़गे ने आरएसएस पर दबाव बढ़ाया
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय का दौरा करने की पेशकश की, ताकि यह समझा जा सके कि इस हिंदू राष्ट्रवादी संगठन को सरकार के साथ पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करने से किस कानून के तहत छूट दी गई थी.
भरत जोशी के अनुसार, इसके विकल्प के रूप में, प्रियांक ने आरएसएस नेताओं को संगठन की कानूनी स्थिति की समीक्षा करने के लिए अपने कार्यालय में आमंत्रित किया.
प्रियांक ने कहा, "आरएसएस मुझे अपने केशव कृपा मुख्यालय में बुलाए. वे मुझे वह कानून दिखाएं, जिसके तहत उन्हें सरकार के प्रति जवाबदेह होने से छूट मिली है. या फिर, वे दस्तावेजों के साथ मेरे कार्यालय आएं. वे दिखाएं कि कैसे उन्हें संवैधानिक प्रावधानों से छूट मिली है. मैं इसका मूल्यांकन करूँगा. अगर मैं गलत हूँ, तो मैं माफी माँगूँगा. अन्यथा, उन्हें सुधार करना होगा. "
प्रियांक आरएसएस के पंजीकरण की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसे इसके सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 'व्यक्तियों का एक निकाय' बताया है.
पिछले साल नवंबर में भागवत ने कहा था: "हमें (क) व्यक्तियों के एक निकाय के रूप में वर्गीकृत किया गया है. और हम एक मान्यता प्राप्त संगठन हैं. आयकर विभाग ने हमसे आयकर का भुगतान करने के लिए कहा था, और इस पर मुकदमा चला था. अदालत ने कहा, 'यह व्यक्तियों का एक निकाय है और हमारी गुरु दक्षिणा (दान) को आयकर से छूट दी गई थी'."
प्रियांक इस बात से असहमत हैं. उन्होंने कहा, "जिस देश में एक रेहड़ी-पटरी वाले (सड़क विक्रेता) को भी पंजीकरण कराना पड़ता है, मंदिरों और भगवानों को मिलने वाले हर दान का हिसाब देना पड़ता है और नागरिकों को टैक्स रिटर्न दाखिल करना पड़ता है, वहां आरएसएस को कैसे छूट मिली हुई है? क्या वे जो चाहें कर सकते हैं?"
उन्होंने कहा, "वे खुद को व्यक्तियों का एक निकाय बताते रहते हैं. यहाँ तक कि बैंगलोर क्लब भी व्यक्तियों का एक निकाय है."
गृह मंत्री का पदभार संभालने के बाद एक ट्वीट में, प्रियांक ने आरएसएस से पंजीकरण के लिए "अपने दस्तावेज तैयार रखने" को कहा था. अतीत में, प्रियांक ने दावा किया है कि कांग्रेस सरकार आरएसएस का पंजीकरण कराने के लिए एक कानून लाएगी.
मंत्री के ट्वीट पर वरिष्ठ भाजपा नेता सी टी रवि ने पलटवार किया, जिन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी और वे विफल रहे थे.
प्रियांक ने आरएसएस को "कायर" बताते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि सी टी रवि अपना इतिहास जानते हैं. संगठन पर प्रतिबंध लगने के बाद आरएसएस नेता नेहरू और सरदार पटेल के चरणों में गिर गए थे. जब इंदिरा गांधी ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया, तो इसके सरसंघचालक ने आपातकाल (इमरजेंसी) का समर्थन करते हुए एक लंबा, प्रशंसात्मक पत्र लिखा था."

