ताश के पत्तों की तरह क्यों बिखर रही है तृणमूल कांग्रेस?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से नाराज होकर 28 में से करीब 20 लोकसभा सांसदों के भाजपा नीत एनडीए (NDA) के पाले में जाने और विधायकों द्वारा रितब्रत बनर्जी को नया नेता प्रतिपक्ष चुनने से ममता बनर्जी के साम्राज्य में दरारें आ गई हैं. रिपोर्ट में चुनावी रणनीतिकारों (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भरता, पुराने नेताओं की अनदेखी, यूसुफ पठान जैसे बाहरी चेहरों की 'पैराशूट राजनीति' और संगठन की अंदरूनी कमजोरी का विस्तृत विश्लेषण किया गया है.
तृणमूल के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर से कहा- हम एनडीए में शामिल होना चाहते हैं
द इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द हिंदू’ की इस संयुक्त ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक का सबसे बड़ा विभाजन हो गया है. सीनियर नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है. यह राजनीतिक घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद सामने आया है. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की 'इंडिया' गठबंधन बैठक के बीच दिल्ली में हुए इस तख्तापलट, बागी सांसदों (शर्मिला सरकार, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी) के बयानों और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों की बगावत की पूरी क्रोनोलॉजी यहाँ पढ़ें.

