"मोदी-निर्मित संकट" — विपक्ष ने प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील को बताया जनता पर बोझ थोपना
श्चिम एशिया संघर्ष के चलते आर्थिक दबाव बढ़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीज़ल का उपयोग कम करने, जहाँ संभव हो घर से काम करने, एक साल के लिए विदेश यात्रा और सोने की ख़रीदारी टालने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू उत्पादों पर निर्भर रहने की अपील की. लेकिन विपक्ष ने इस अपील की तीखी आलोचना की, ख़ासकर इस बात पर कि यह अपील चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद आई.
मोदी की मितव्ययिता की अपील सिर्फ पश्चिम एशिया संकट के बजाय आर्थिक कुप्रबंधन को दर्शाती है
विधानसभा चुनाव ख़तम होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया संबोधन ने भारत की आर्थिक चिंताओं, वैश्विक अस्थिरता और आम नागरिकों की जीवनशैली को एक साथ जोड़ दिया है. हैदराबाद की एक रैली में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कोविड काल के कुछ व्यवहार फिर से अपनाएँ. जैसे वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग्स और सीमित यात्रा. ताकि बढ़ते वैश्विक संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके.

