"मोदी-निर्मित संकट" — विपक्ष ने प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील को बताया जनता पर बोझ थोपना

“द वायर” की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते आर्थिक दबाव बढ़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीज़ल का उपयोग कम करने, जहाँ संभव हो घर से काम करने, एक साल के लिए विदेश यात्रा और सोने की ख़रीदारी टालने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू उत्पादों पर निर्भर रहने की अपील की. लेकिन विपक्ष ने इस अपील की तीखी आलोचना की, ख़ासकर इस बात पर कि यह अपील चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद आई.

कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि यह "मोदी-निर्मित आपदा है, ठीक वैसे ही जैसे वे कोविड के दौरान सुस्त रहे थे." पार्टी ने कहा, "सारा बोझ जनता पर डालो, जबकि वे बस 'जनसंपर्क मंत्री' की भूमिका निभाते हुए इधर-उधर घूमते रहें." नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी पर "समझौताकारी प्रधानमंत्री" होने का आरोप लगाते हुए कहा, "12 सालों में देश को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है कि जनता को बताना पड़ रहा है — क्या ख़रीदो, क्या नहीं ख़रीदो, कहाँ जाओ, कहाँ मत जाओ. हर बार ज़िम्मेदारी लोगों पर डाल दो."

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि चुनाव ख़त्म होने के बाद ही ये उपाय क्यों सूझे. उन्होंने एक्स पर लिखा, "भाजपा नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान हज़ारों चार्टर उड़ानें लीं, उन पर यह प्रतिबंध क्यों नहीं लागू हुआ?" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की अपील से व्यापार, कारोबार और बाज़ारों में भय और अफ़रातफ़री फैल सकती है.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि देशभक्ति के नाम पर जनता को पेट्रोल, डीज़ल, गैस और सोना सब कुछ छोड़ने को कहा जा रहा है, जबकि "मोदी जी रैलियों में लाखों लोग लाएँगे, विदेश दौरे करेंगे." राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि कोविड के दौरान भी और अब भी सरकारी ख़र्च में कोई कटौती नहीं दिखी. उन्होंने बताया कि पिछले हफ़्ते देशभर के अख़बारों में कई पन्नों के पूरे-पेज के सरकारी विज्ञापन छपे, जिनका ख़र्च आख़िरकार आम जनता ही उठाती है. उन्होंने कहा, "सवाल अपील का नहीं, बल्कि उस नैतिक संगति — या असंगति — का है जो किसी भी लोकतांत्रिक नेतृत्व की विश्वसनीयता की बुनियाद बनती है."

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिट्टास ने माँग की कि प्रधानमंत्री अपनी सात अपीलों पर खुद सबसे पहले अमल करें, ख़ासकर विदेश यात्रा पर. द वायर के विश्लेषण के अनुसार मोदी ने रविवार को यह अपील करने से कुछ घंटे पहले हैदराबाद में और बाद में गुजरात के सोमनाथ में रोडशो किए — जो उनके द्वारा प्रचारित ईंधन बचत और कम आवाजाही के संदेश के बिल्कुल विपरीत था.

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