‘भाजपा तय करेगी कि कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव
राजनीतिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. 'हिंदुस्तान टाइम्स' के अनुसार, इस मामले में याचिकाकर्ता रहे यादव ने आरोप लगाया कि अदालत संवैधानिक सिद्धांतों की जांच करने से पीछे हट गई है. उन्होंने दावा किया कि इस फैसले के बाद करोड़ों नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने वाला आखिरी स्तंभ भी टूट गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की दिशा में एसआईआर प्रक्रिया को सही ठहराया
द हिंदू (कृष्णदास राजगोपाल) की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें SIR को पिछले दरवाजे से नागरिकता की जांच का जरिया बताया गया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 324 के तहत निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाताओं के दस्तावेजी सत्यापन की मांग पूरी तरह उचित है. पढ़ें कोर्ट का पूरा फैसला.

