‘भाजपा तय करेगी कि कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं’: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव
राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने ‘एसआईआर’ को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक होने के नाते, वे इस फैसले से हैरान नहीं हैं क्योंकि यह "बहुत पहले ही तय" हो चुका था. यादव ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से ही अनुमानित था और उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी भाजपा अब यह तय करेगी कि "कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं."
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के अनुसार, राजनीतिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक ने शीर्ष अदालत के फैसले की कड़ी आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि अदालत इस प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच करने से पीछे हट गई और इसके बजाय उसने "शिकायत निवारण और मध्यस्थता पर ध्यान केंद्रित किया."
फैसले के बाद 'एक्स' पर एक पोस्ट में यादव ने कहा कि उन्होंने एसआईआर मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में शामिल न होने का विकल्प चुना क्योंकि उनका मानना था कि इसका परिणाम बहुत पहले ही स्पष्ट हो गया था.
उन्होंने लिखा: "इस मामले में एक वादी (याचिकाकर्ता) के रूप में, और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसे अदालत को संबोधित करने का सम्मान दिया गया था, मुझे आशान्वित, चिंतित या कम से कम उत्सुक होना चाहिए था. लेकिन मैं ऐसा नहीं था. इस मामले का फैसला बहुत पहले ही हो चुका था। अदालत एसआईआर की संवैधानिकता की जांच करने से दूर हट गई और उसने खुद को प्रभावी रूप से एक 'कंज्यूमर फोरम' (उपभोक्ता मंच) में बदल लिया, जिसका ध्यान संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय शिकायत निवारण और मध्यस्थता पर केंद्रित था."
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा "प्रभावी रूप से तभी तय" हो गया था जब शीर्ष अदालत ने संवैधानिक चुनौती पर फैसला सुनाने से पहले ही चुनाव आयोग को बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जारी रखने की अनुमति दे दी थी. उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूचियों में मौजूद उन कमियों को दूर करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए, जिन्हें उन्होंने "गंभीर त्रुटियां" बताया था.
यादव ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसआईआर प्रक्रिया का जारी रहना इस चुनौती को काफी कमजोर कर गया. उन्होंने कहा, "एसआईआर एक ऐसी स्थिति बन चुकी थी जिसे बदला नहीं जा सकता." उन्होंने आगे जोड़ा कि सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां, जिसमें यह संकेत दिया गया था कि किसी को भी इस प्रक्रिया को रोकने की अनुमति नहीं दी जाएगी, अदालत के रुख को दर्शाती थीं.
अपनी कुछ सबसे तीखी टिप्पणियों में उन्होंने कहा कि इस फैसले ने "लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने को अधिकृत (मंजूरी) कर दिया है, जो अब तक कम से कम 5.9 करोड़ हैं और आगे चलकर 10 करोड़ तक पहुंच सकते हैं."
एक अन्य पोस्ट में यादव ने कहा कि इस फैसले का असर केवल एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी समर्थन देने तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा, "खबर यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव आयोग के एसआईआर को संवैधानिक घोषित कर दिया है. असली खबर यह है कि अब इस देश में भाजपा तय करेगी कि कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं."
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के हिस्से, जिन्हें उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने वाला "शायद आखिरी स्तंभ" कहा था, वे "आज टूटकर गिर गए हैं."

