हरकारा रोज़ाना हरकारा रोज़ाना

संजय बारू | भारत-चीन रणनीतिक आर्थिक वार्ता को फिर से शुरू करने का समय आ गया है

'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित संजय बारू के विशेष लेख का हिंदी अनुवाद. भारत-चीन संबंधों में हालिया नरमी के बीच सीमा विवाद से इतर 'आर्थिक सुरक्षा वार्ता' को पुनर्जीवित करने और अमेरिका के व्यापारिक रुख को देखते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर गहरा विश्लेषण.

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डरपोक मीडिया नहीं बताता; ‘मोदी ने देश “बदलने के लिए 10 साल” मांगे थे, पर आर्थिक मोर्चे पर वह विफल’

प्रसिद्ध नीति विश्लेषक संजय बारू ने 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' में सरकार के 12 वर्षों के आर्थिक सफर का एक गंभीर और बेबाक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है. लेख में सुरजीत भल्ला की 'प्रशासनिक सुस्ती' के तर्क और परकला प्रभाकर की 'प्रबंधकीय अक्षमता' के सिद्धांतों के जरिए दिखाया गया है कि कैसे सामाजिक तनाव और भय के माहौल ने निवेशकों के भरोसे को तोड़ दिया है, जिससे भारत 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य से भटककर 4 ट्रिलियन डॉलर पर ही ठहर गया है. पढ़ें पूरा विश्लेषण.

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