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“वोटर लिस्ट से नागरिकता तक”: सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फ़ैसले ने क्यों बढ़ा दी देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक बहस?

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा बिहार सहित 12 राज्यों में चलाई गई 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को कानूनी रूप से वैध ठहरा दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए वोटर लिस्ट की शुद्धता आवश्यक है. हालांकि, फैसले के बाद देश में 'दस्तावेज़ आधारित नागरिकता' और वोटिंग के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है, क्योंकि इस प्रक्रिया के तहत अब तक 5 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव के बयानों और इसके व्यापक आर्थिक व राजनीतिक प्रभावों पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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एस.वाई. कुरैशी | सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानूनी तौर पर सही, पर ज़मीनी हकीकत के मामले में लगभग पूरी तरह गलत

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गंभीर समीक्षा की है. उनका मानना है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का यह फैसला संवैधानिक रूप से सही होने के बावजूद ज़मीनी हकीकत से दूर है, क्योंकि यह गरीब और प्रवासी मतदाताओं को अदालती चक्करों में उलझाकर व्यावहारिक रूप से मताधिकार से वंचित कर देता है. पढ़ें पूरा लेख.

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