इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 दिनों तक अवैध हिरासत में रखे गए मुस्लिम व्यक्ति को ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज के मंसूर अहमद को आठ दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को ₹2 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शक्तियों के घोर दुरुपयोग को 'चौंकाने वाली स्थिति' करार देते हुए निर्देश दिया है कि मुआवजे की यह राशि तीन महीने के भीतर अनुशासनात्मक जांच पूरी कर जिम्मेदार सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) से वसूल की जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने निवारक हिरासत (Preventive Detention) और गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए भविष्य के लिए नए सुरक्षा उपाय भी तय किए हैं. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकारा, कहा- अफसर संविधान के बजाय राजनीतिक आकाओं की सेवा करते हैं
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और गैंगस्टर एक्ट के मनमाने इस्तेमाल पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. गाजियाबाद के राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले को खारिज करते हुए अदालत ने ललिता त्यागी की 80 दिनों की जेल को पूरी तरह से अवैध और अनुचित करार दिया. राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए एनकाउंटर, चुनिंदा टारगेटेड कार्रवाई, ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल और गाजियाबाद के पूर्व पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा को मिली चेतावनी पर पढ़ें पूरी विस्तृत कानूनी रिपोर्ट.

