नितिन नवीन की सीट से चुनावी पदार्पण की तैयारी में प्रशांत किशोर, क्यों यह जन सुराज के लिए 'मेक ऑर ब्रेक' साबित हो सकता है?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की विशेष राजनीतिक रिपोर्ट. बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से कर सकते हैं चुनावी डेब्यू. जानिए जन सुराज और भाजपा का पूरा समीकरण.
कैसे एक बंगाली विज्ञापन एजेंसी ने भाजपा के ‘भय नॉय भरोसा’ अभियान को आकार दिया
प्रसून चौधरी की इस विशेष मीडिया व राजनीतिक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले भाजपा ने राज्य में कथित 'भय' के माहौल को बदलने और 'भरोसा' जगाने के लिए कोलकाता की मशहूर विज्ञापन एजेंसी 'रिस्पॉन्स इंडिया' को अपना चुनावी कमान सौंपा था. इस बेहद सीक्रेट प्रोजेक्ट के तहत समानांतर टीमों ने बिना किसी को भनक लगे मात्र 48 घंटों के भीतर 13 लघु फिल्में तैयार कीं. फिल्म निर्माता द्रोण आचार्य के खुलासे के मुताबिक, राजनीतिक गुंडागर्दी के डर के कारण क्रू को भारी जोखिम उठाकर बांटला और डायमंड हार्बर के गांवों में छिपे हुए कैमरों के साथ 'रन-एंड-गन' (गुरिल्ला स्टाइल) शूटिंग करनी पड़ी. जानिए एआई (AI) दृश्यों पर पाबंदी, टीएमसी के खिलाफ तैयार 'चार्जशीट' और मूल बंगाली नारों के दम पर गढ़े गए इस सफल विज्ञापन अभियान की पूरी कहानी.
टीवीके को कांग्रेस के समर्थन से भाजपा असहज, एआईडीएमके पर विभाजन का खतरा
जे. जयललिता के निधन के बाद से अपने सबसे गंभीर आंतरिक विखंडन की ओर बढ़ती दिख रही है. पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या विजय की 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) को गठबंधन सरकार बनाने में समर्थन दिया जाए या नहीं.
पंजाब को लेकर भी भाजपा के अरमान जागे
पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में मिली चुनावी सफलताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसलों को नई उड़ान दी है. भाजपा अब पंजाब को एक ऐसे अगले 'डोमिनो' (एक के बाद एक गिरने वाली कड़ी) के रूप में देख रही है, जिसे वह अपने पाले में कर सकती है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया है. साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में भाजपा किसी बैसाखी के बिना, यानी अकेले चुनाव लड़ेगी.
‘मर्ज़ लाइलाज है, पूरा भारतीय समाज राघव चड्ढा है’
2011 में अन्ना हज़ारे ने जंतर मंतर पर अनशन शुरु किया. देश को लगा भ्रष्टाचार अब जल्द ख़त्म हो जाएगा. हज़ारों की भीड़ जमा हो गई. क्रांति को नाम मिला ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’. नामी गिरामी एक्टिविस्ट, वकील, बाबा, पत्रकार, एक्टर, कॉमेडियन, आर्टिस्ट और न जाने कौन कौन उसमें शामिल हो गए. मेरी एक मुंहबोली बहन भी उनमें थीं. मैं ख़ुद तो वहाँ कभी नहीं गया.

