हरकारा रोज़ाना हरकारा रोज़ाना

‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से ‘दिमागी नक्सल’ तक: जब जवाबों की जगह लेबल ले लेते हैं

'काउंटरकरंट्स' में मोहम्मद ज़ियाउल्लाह खान का विश्लेषण: 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे लेबल पर नई पीढ़ी के सवाल, असहमति और लोकतंत्र पर बड़ा विमर्श.

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मनोज कुमार झा | दबी हुई आवाज़ें

'द टेलीग्राफ' में मनोज कुमार झा का विश्लेषण: भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव और नागरिक 'आवाज़' के कमजोर होने पर गहन विमर्श.

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