शोभन सक्सेना | अगर अमेरिका अपना हाथ खींच ले, तो इज़राइल आर्थिक और राजनीतिक तौर पर टिक नहीं पाएगा
हरकारा डीप डाइव के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार नितीश त्यागी और ब्राज़ील से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना ने ईरान-इज़राइल युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्तों, अमेरिका की वैश्विक रणनीति, पेट्रो-डॉलर राजनीति, भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया युद्ध अब उनके नियंत्रण से बाहर जाता दिखाई दे रहा है और क्यों दुनिया भर के बाज़ार, तेल व्यापार और कूटनीतिक समीकरण इससे अस्थिर हो गए हैं.
शोभन सक्सेना | अगर अमेरिका अपना हाथ खींच ले, तो इज़राइल आर्थिक और राजनीतिक तौर पर टिक नहीं पाएगा
हरकारा डीप डाइव के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार नितीश त्यागी और ब्राज़ील से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना ने ईरान-इज़राइल युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्तों, अमेरिका की वैश्विक रणनीति, पेट्रो-डॉलर राजनीति, भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया युद्ध अब उनके नियंत्रण से बाहर जाता दिखाई दे रहा है और क्यों दुनिया भर के बाज़ार, तेल व्यापार और कूटनीतिक समीकरण इससे अस्थिर हो गए हैं.
ईरान में अमेरिका की 'शह और मात'?
10 मई 2026 का लेख “चेक मेट इन ईरान” (ईरान में शह-मात) अमेरिका-इजराइल के ईरान अभियान को अमेरिका की बड़ी रणनीतिक हार बताता है. केगन, एक प्रमुख नव-संरक्षणवादी विचारक, लिखते हैं कि 37 दिनों की हमलों के बावजूद ईरानी शासन नहीं गिरा. ईरान अब हार्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखता है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर उसकी ताकत बढ़ाता है. इससे चीन-रूस मजबूत हुए हैं, अमेरिका की विश्वसनीयता घटी है और विश्व व्यवस्था में अमेरिका का वर्चस्व कम हो रहा है.

