कैसे हिंदुत्व पश्चिम बंगाल में सत्ता-विरोधी लहर की भाषा बन गया
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने राज्य के सियासी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है, जहां भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई है और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. रिपोर्ट में विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि कैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ उपजे जन-आक्रोश (जैसे स्कूल सर्विस कमीशन भर्ती घोटाला और आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना) को भाजपा ने हिंदू पहचान और हिंदुत्व के वैचारिक ढांचे में समाहित किया. लेख में विजय रैलियों में बुलडोजर के इस्तेमाल, मायापुर में गौ-पूजा, तुष्टिकरण विरोधी संदेशों और बंगाल के दबे हुए सांप्रदायिक इतिहास पर शहरी मध्यवर्ग के बदलते रुख का पूरा राजनीतिक ब्योरा पढ़ें.
आकार पटेल: भाजपा मुस्लिमों का पूर्ण बहिष्कार चाहती है
ख़ासकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले अपने मौजूदा स्वरूप में, इस तथ्य के बारे में स्पष्ट है कि वह भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक वर्ग का पूर्ण बहिष्कार चाहती है, जिसके ख़िलाफ़ वह ऐतिहासिक नाराज़गी रखती है. हमें इस भावना के गुण-दोषों में जाने की ज़रूरत नहीं है, सिवाय यह स्वीकार करने के कि पार्टी और उसके कई समर्थक ऐसा ही महसूस करते हैं. विचार करने वाला मुद्दा कुछ और है: जब भाजपा—और विशेष रूप से प्रधानमंत्री—इस बहिष्कार को बढ़ावा देने को लेकर इतने स्पष्ट हैं, तो फिर हम 'सबका साथ, सबका विश्वास' जैसे नारे और '140 करोड़ भारतीयों' के संदर्भ क्यों सुनते हैं?

