तेल कंपनियों ने 9 माह में ₹1.37 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया, लेकिन लोगों को धेला लाभ नहीं मिला
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुरुवार को ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 4 साल का उच्चतम स्तर है. हालांकि, बाद में कीमतें गिरकर $116 पर आ गईं. लिहाजा एजेंसियों के हवाले से यह खबर दी जा रही है कि ईरान युद्ध के कारण महंगे कच्चे तेल से देश की तेल कंपनियों को रोजाना ₹2,400 करोड़ का नुकसान हो रहा है. पेट्रोल पर ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है. जिससे तेल कंपनियां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का दबाव बना रही हैं. जबकि वास्तविकता यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कच्चे तेल की औसत कीमत महज $71 प्रति बैरल थी, जो कोविड वर्ष 2020-21 के बाद सबसे कम है.
ईरान संघर्ष: नए शीत युद्ध की आहट, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी
‘एक्सिओस’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ अमेरिकी टकराव अब शीत युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गया है — वित्तीय प्रतिबंध, समुद्री नाकाबंदी और बातचीत के प्रयासों के बीच. कई अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सिस को बताया कि उन्हें डर है कि अमेरिका एक ऐसे “जमे हुए संघर्ष” में फंस सकता है जहां न युद्ध हो न कोई समझौता.

