हर 36 मिनट में एक मौत. भारत का मानसिक स्वास्थ्य संकट कितना गहरा है?
भारत में मानसिक बीमारी अब सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं रही. यह एक ऐसा सामाजिक संकट बन चुकी है जो हर 36 मिनट में एक जान ले रहा है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि बीते साल मानसिक बीमारी से जुड़ी आत्महत्याओं के 14,305 मामले दर्ज किए गए. यानी साल भर में हर दिन लगभग 39 लोग और हर 36 मिनट में एक व्यक्ति ने मानसिक पीड़ा के कारण अपनी जान गंवाई.
मोदी की नोटबंदी के बाद भी नकली नोटों का प्रचलन अभी भी एक हकीकत
8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹1,000 और ₹500 के नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद करने (विमुद्रीकरण) की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि यह कदम काले धन, जाली मुद्रा और भ्रष्टाचार पर एक बड़ा प्रहार होगा. इस घोषणा के बाद के दिनों में जनता के बीच अफरा-तफरी देखी गई, एटीएम पर लंबी कतारें लगीं, कई मौतें हो गईं और व्यापक आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में.

