मोदी की नोटबंदी के बाद भी नकली नोटों का प्रचलन अभी भी एक हकीकत
8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹1,000 और ₹500 के नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद करने (विमुद्रीकरण) की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि यह कदम काले धन, जाली मुद्रा और भ्रष्टाचार पर एक बड़ा प्रहार होगा. इस घोषणा के बाद के दिनों में जनता के बीच अफरा-तफरी देखी गई, एटीएम पर लंबी कतारें लगीं, कई मौतें हो गईं और व्यापक आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में.
हालाँकि, काले धन और भ्रष्टाचार को खत्म करने पर इस कवायद के प्रभाव को लेकर अभी भी बहस जारी है, लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की नवीनतम 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट बताती है कि लगभग एक दशक बाद भी नकली नोटों (मुद्रा) की समस्या बनी हुई है. आंकड़ों के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों से ₹54.61 करोड़ से अधिक मूल्य की जाली मुद्रा जब्त की गई. जब्त की गई मुद्राओं में लगभग छह लाख ₹500 के नोट और एक लाख से अधिक ₹2,000 के नोट शामिल थे—जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2023 में चलन से वापस लेने का फैसला किया था, हालांकि वे अभी भी वैध मुद्रा बने हुए हैं.
नोटबंदी के बाद अब तक कुल ₹638 करोड़ मूल्य के नकली नोट जब्त
‘द हिंदू’ में सांभवी पार्थसारथी की रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी (विमुद्रीकरण) के एक साल बाद, यानी 2017 से अब तक कुल ₹638 करोड़ मूल्य की नकली मुद्रा जब्त की गई है. साल 2024 में जब्त किए गए जाली नोटों का मूल्य 2016 के बाद से तीसरा सबसे अधिक रहा. वर्ष 2020 में, जब कोविड-19 फैला था, ₹92 करोड़ की जब्ती देखी गई थी. वहीं 2022 में, कोविड-19 महामारी शुरू होने के दो साल बाद, ₹382.6 करोड़ की भारी-भरकम राशि के बराबर जाली मुद्रा जब्त की गई थी.
आंकड़े ₹500 और ₹2,000 के नोटों की जाली मुद्रा में वृद्धि की ओर भी इशारा करते हैं. 2024 में अधिकारियों द्वारा जब्त किए गए ₹500 के नोटों की संख्या 2016 में जब्त किए गए नोटों की तुलना में लगभग चार गुना थी. विमुद्रीकरण के बाद शुरू किए गए ₹2,000 के जाली नोटों की संख्या, 2017 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई.
कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा की गई जब्ती पर एनसीआरबी द्वारा दर्ज आंकड़ों के अलावा, संसद के आंकड़ों से पता चला है कि 2020-21 और 2024-25 के बीच पांच वर्षों की अवधि में, बैंकिंग प्रणाली में प्रवेश करने के बाद विभिन्न मूल्यवर्ग के 11 लाख से अधिक जाली नोट पकड़े गए और रिपोर्ट किए गए, जिनका कुल मूल्य ₹40.26 करोड़ था. यानी, बैंकों द्वारा हर साल औसतन लगभग दो लाख जाली नोटों का पता लगाया गया है.
इन नोटों का मूल्यवर्ग-वार विवरण यह दर्शाता है कि ₹200 और ₹500 जैसी नई मुद्राएँ, जिन्हें फिर से जारी किया गया था, उनकी भी जालसाजी की जा रही है. नोटबंदी (विमुद्रीकरण) के बाद छपी नई श्रृंखला के चार लाख से अधिक ₹500 के नोट, इन (बैंकों में पकड़े गए) नोटों का लगभग 37% हिस्सा थे. वहीं, लगभग तीन लाख ₹100 के नोट, बैंकों में रिपोर्ट किए गए जाली नोटों का 26% हिस्सा थे.
जब्त किए गए जाली नोटों का राज्य-वार विवरण दिखाता है कि 2017 और 2024 के बीच जब्त किए गए नकली धन के मूल्य के मामले में गुजरात सबसे आगे रहा. राज्य में जब्त की गई जाली मुद्रा का मूल्य ₹355.72 करोड़ था, जो इस अवधि के दौरान देश में हुई कुल जब्ती के मूल्य के आधे से भी अधिक था. गुजरात के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान रहा, जहाँ क्रमशः ₹100 करोड़ और ₹50 करोड़ मूल्य की जाली मुद्रा जब्त की गई.
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि इस साल मई तक, ₹42.12 लाख करोड़ से अधिक के कुल मूल्य वाले 174 बिलियन (17,400 करोड़) से अधिक नोट चलन में थे. यह नवंबर 2016 की तुलना में लगभग 137% की वृद्धि है, जब चलन में मौजूद मुद्रा का मूल्य ₹17.74 लाख करोड़ था.
यह इंगित करता है कि विमुद्रीकरण अभ्यास का दूसरा उद्देश्य, यानी नकदी के लेन-देन को कम करना, उसका भी वांछित प्रभाव नहीं पड़ा है.

