बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग
केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.
बंगाल चुनाव में आलू का भी दर्द; भाजपा को क्यों दिख रही है उम्मीद
पश्चिम बंगाल के हुगली और बर्धमान जिलों में, जो राज्य की आलू अर्थव्यवस्था का केंद्र हैं, किसानों के बीच गहरी हताशा और अनिश्चितता का माहौल है. जिस आलू ने कभी इन क्षेत्रों को समृद्धि दी थी, वही आज बंपर पैदावार के कारण किसानों के लिए 'श्राप' बन गया है. कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर दूर, भतार विधानसभा सीट के छोर पर, आलू किसान एक चाय की दुकान पर बैठकर अपने अस्तित्व के संघर्ष पर चर्चा कर रहे थे. उन्हें उन एसयूवी की कोई परवाह नहीं थी जो हाईवे पर तेज़ी से गुज़र रही थीं—जिनमें से कुछ पर्यटकों को बीरभूम ले जा रही थीं और कुछ चुनाव आयोग के अधिकारियों को बंगाल में ड्यूटी पर.
अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
आरएसएस नेतृत्व महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को संभालने के तरीके को लेकर मोदी और शाह से नाराज़ है. उन्होंने यह उम्मीद नहीं की थी कि एक सावधानीपूर्वक नियोजित रणनीति को इस जोड़ी द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा. बंगाल में मोदी द्वारा लगभग पूरे भाजपा नेतृत्व और मंत्री सहयोगियों की तैनाती का उल्टा असर हुआ है, क्योंकि कई बंगाली उनके प्रचार के अंदाज़ को बंगाली संस्कृति और सामाजिक मानदंडों को नज़रअंदाज़ करने वाला मान रहे हैं. परिसीमन विधेयक का उपयोग उस तरह से नहीं किया गया जैसा कि आरएसएस ने मूल रूप से सोचा था.

