बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग

‘एसआईआर’ में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने, सैकड़ों अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले करने, लाखों की संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान केंद्र सरकार के पर्यवेक्षक/कर्मचारी तो मतगणना मेज पर तैनात रहेंगे, लेकिन राज्य सरकार के नहीं. केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में आशीष शाजी के अनुसार, यह फैसला तब आया जब टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनकी सीमित शिकायत यह थी कि सर्कुलर के अनुसार, राज्य सरकार का भी एक प्रतिनिधि होना चाहिए.

इसके जवाब में, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि हमेशा से इसी नियम का पालन किया जाता रहा है.

दरअसल, 30 अप्रैल को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके अनुसार प्रत्येक मतगणना मेज पर कम से कम एक मतगणना पर्यवेक्षक/सहायक केंद्र सरकार या केंद्रीय पीएसयू का कर्मचारी होना अनिवार्य है.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था: "यह भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय का विशेषाधिकार है कि वह राज्य सरकार या केंद्र सरकार में से किसी से भी मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक नियुक्त करे. अदालत को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय पीएसयू कर्मचारी को नियुक्त करने में कोई अवैधता नहीं दिखती है."

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