यूपी के स्कूलों में अव्यवस्थाओं और बच्चों की तकलीफों वाले वीडियो वायरल, यूट्यूबर्स के प्रवेश पर प्रतिबंध
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर, बस्ती, आगरा, आजमगढ़ और बलिया सहित कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) ने परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ‘बाहरी लोगों’, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. जारी निर्देशों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना परिसरों के भीतर किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं होगी. बलरामपुर के बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव और बस्ती के बीएसए अनूप कुमार तिवारी का तर्क है कि यूट्यूबर्स केवल व्यूज़ बढ़ाने और मौद्रिक लाभ कमाने के उद्देश्य से बिना अनुमति कक्षाओं में घुस जाते हैं, जिससे शिक्षण कार्य बाधित होता है, शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुँचती है और विभाग की छवि खराब होती है. हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अनुशासन, बच्चों की सुरक्षा और आवारा पशुओं व असामाजिक तत्वों को रोकने के लिए उठाया गया एक प्रशासनिक कदम है.
उमर रशीद के अनुसार, यह प्रशासनिक कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य के विभिन्न जिलों में छात्र-छात्राएं बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रणालीगत विफलताओं को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. यह तो पता नहीं है कि प्रेरणा कहाँ से मिली, लेकिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद स्कूली बच्चों के सड़क पर उतरकर अपनी तकलीफों को प्रशासन के सामने रखने के मामलों में खासा इजाफ़ा हुआ है.
फतेहपुर में सर्वोदय इंटर कॉलेज के लगभग 1,500 छात्रों ने पीने के साफ पानी, चालू पंखों, सुरक्षित बिजली के तारों, छत के रिसाव को रोकने और मिड-डे मील जैसी बुनियादी मांगों को लेकर 4 घंटे का धरना दिया, जिसके बाद प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा.
उन्नाव और लखनऊ में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अलग-अलग प्रदर्शन कर शिक्षकों के खाली पदों और खराब भोजन के खिलाफ मुख्य सड़कों को जाम किया.
अन्य जिलों में कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय में खराब भोजन के खिलाफ छात्रों ने भूख हड़ताल की. मुरादाबाद में स्कूल के पास शराब की दुकान हटाने के लिए विरोध हुआ, जबकि हमीरपुर में जलभराव वाले रास्तों को लेकर बच्चों ने 5 किलोमीटर लंबा मार्च निकाला, जिस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया.
अधिकारियों के दावों के विपरीत, कई घटनाओं से पता चलता है कि सोशल मीडिया वीडियो ने स्कूलों में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को उजागर किया है. सीतापुर में मिड-डे मील में बच्चों को पानी जैसी पतली सब्जी परोसे जाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रधानाध्यापिका को निलंबित और रसोइए को बर्खास्त किया गया. बलिया में बच्चों को थाली की जगह सीधे हाथों पर रोटियां देने का वीडियो सामने आने पर कार्यवाहक प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई हुई.
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि विभाग खुद नियमित निरीक्षण कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर रहा है, जैसे बस्ती के बहादुरपुर में मिड-डे मील में अनियमितता और गुटखा खाने पर एक हेडमास्टर को निलंबित किया गया.

