दुनिया भर में शिक्षा पर हमले बढ़े, भारत में भी दर्ज हुई चिंताजनक घटनाएं

‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, दुनिया भर में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, छात्रों और शिक्षकों पर हमलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. शिक्षा पर हमलों से सुरक्षा के लिए काम करने वाले वैश्विक गठबंधन की नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दुनिया भर में शिक्षा से जुड़े संस्थानों और लोगों पर 8,500 से अधिक हमले हुए. यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक है.

इन हमलों में कम से कम 10,600 छात्र, शिक्षक, प्रोफेसर और शिक्षा कर्मी प्रभावित हुए. कुल 83 देशों में शिक्षा पर हमले दर्ज किए गए, जिनमें 55 ऐसे देश भी शामिल हैं जहां सक्रिय सशस्त्र संघर्ष नहीं चल रहा था. सबसे अधिक हमले कोलंबिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, हैती, फिलिस्तीन और यूक्रेन में दर्ज किए गए.

रिपोर्ट में भारत का भी उल्लेख किया गया है. वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों पर हमलों की संख्या बढ़ी. इस अवधि में कम से कम 17 स्कूलों पर हमले, 64 छात्रों और शिक्षा कर्मियों पर हमले तथा उच्च शिक्षा संस्थानों और उनसे जुड़े समुदायों पर 154 हमले दर्ज किए गए.

इन घटनाओं में मणिपुर की जातीय हिंसा, स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां, आगजनी और छात्रों तथा शिक्षकों के आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई शामिल रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम हमले के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल में विभिन्न राज्यों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और मजदूरों को धमकियों, उत्पीड़न और हमलों का सामना करना पड़ा.

रिपोर्ट धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं का भी उल्लेख करती है. इसमें कहा गया है कि मुसलमानों और ईसाइयों सहित अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा जारी रही. साथ ही कई राज्यों में मुस्लिम घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की घटनाएं भी सामने आईं.

हिंसा के अलावा प्राकृतिक आपदाओं ने भी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया. उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, बिहार, केरल, असम और मिजोरम समेत कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण शिक्षा बाधित हुई. इन घटनाओं से बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित हुए और अनेक स्कूलों को नुकसान पहुंचा.

रिपोर्ट में छात्रों और शिक्षकों के आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग, हिरासत और गिरफ्तारियों का भी उल्लेख किया गया है. इसके अलावा संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों के सैन्य उपयोग तथा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर हमलों की घटनाएं भी दर्ज की गईं.

वैश्विक स्तर पर फिलिस्तीन सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा. वहां शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर 2,000 से अधिक हमले दर्ज किए गए और 2025 के अंत तक गाजा के लगभग सभी स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके थे. यूक्रेन में 900 से अधिक स्कूलों पर हमले हुए, जबकि हैती में 400 से अधिक हमले दर्ज किए गए.

रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों के सैन्य उपयोग की घटनाएं भी लगभग दोगुनी हो गई हैं. वर्ष 2024-25 के दौरान ऐसे 1,900 से अधिक मामले दर्ज किए गए. इससे न केवल शिक्षा बाधित होती है बल्कि बच्चों के जबरन भर्ती किए जाने, यौन हिंसा और हमलों का खतरा भी बढ़ जाता है.

रिपोर्ट में लड़कियों और महिलाओं के सामने बढ़ते खतरों पर भी चिंता जताई गई है. कई देशों में लड़कियों के स्कूलों को निशाना बनाया गया और संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा की घटनाएं सामने आईं. अफगानिस्तान में छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध जारी रहने और महिला शिक्षकों को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है.

रिपोर्ट तैयार करने वाली प्रमुख शोधकर्ता फेलिसिटी पियर्स का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि अनेक घटनाएं कभी दर्ज ही नहीं हो पातीं. वहीं संगठन की निदेशक लिसा चुंग बेंडर ने कहा कि यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि बच्चों और शिक्षा की सुरक्षा से जुड़े वैश्विक मानदंड कमजोर पड़ रहे हैं. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षा को सुरक्षित रखने की वैश्विक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.

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