सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को व्यक्तिगत प्रतिवादी बनाया और भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 10-11 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है. इन याचिकाओं में सीईसी के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म-6 में बदलावों को चुनौती दी गई है. प्रमुख याचिका ‘राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ में सीईसी ज्ञानेश कुमार को व्यक्तिगत प्रतिवादी बनाया गया है और अब उन्हें अपना जवाब दाखिल करना होगा. पीठ ने नए मतदाता को पंजीकृत करने वाले फॉर्म 6 के संशोधन पर भी निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया.
अपूर्वा विश्वनाथ के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनों के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं.
अदालत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफ़ाई करने के दिल्ली पुलिस के फैसले की जांच पर सहमत हो गई है. पुलिस ने इसके स्थान पर बुराड़ी, रामलीला मैदान और सीबीडी ग्राउंड को वैकल्पिक स्थल बनाया है.
वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने तर्क दिया कि विरोध स्थल ऐसा होना चाहिए जहाँ प्रदर्शनकारी सत्ता तक अपनी आवाज़ पहुँचा सकें. इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि 'सुना जाने' का अर्थ तकनीक के परिप्रेक्ष्य में भी समझा जाना चाहिए.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) और धारा 172 की समीक्षा की मांग पर वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि संवैधानिक कानून में आए बदलावों के कारण दोनों प्रावधानों की जांच ज़रूरी है.
महिला पत्रकारों की सुरक्षा व अन्य याचिकाएं
'नेटवर्क ऑफ वूमेन इन मीडिया' की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त जजों व पुलिस अधिकारियों की स्वतंत्र समिति की मांग की. उन्होंने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक महिला पत्रकार को दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने की भी अपील की.
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज मोबाइल धारक हर व्यक्ति खुद को पत्रकार बताता है. न्यायमूर्ति बागची ने भी टिप्पणी की कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी नागरिक को पत्रकार बनने का अधिकार देती है, इस पर व्यापक विचार की आवश्यकता है.
इसके अलावा, अदालत रेहड़ी-पटरी वालों की उस याचिका पर भी सुनवाई के लिए तैयार हुई जिसमें प्रदर्शनों के कारण हुए आर्थिक नुकसान के मुआवजे की मांग की गई है.
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया द्वारा न्यायपालिका पर दबाव बनाने के प्रयासों का जिक्र करने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया, "हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता. हम किसी हाथीदांत के टावर में नहीं बैठे हैं और जानते हैं कि अदालत के अंदर और बाहर क्या कहा जा रहा है."

