ईरान और अमेरिका युद्ध रोकने तथा होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

‘रॉयटर्स’ के लिए पेरिसा हाफेज़ी, योमना एहाब और हुमेइरा पामुक की रिपोर्ट है कि अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने एक ऐतिहासिक प्रारंभिक समझौते (फ्रेमवर्क) की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करना और महीनों से बंद पड़े होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है.हालांकि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को आगे की वार्ताओं पर छोड़ दिया गया है, लेकिन इस सौदे को मध्य-पूर्व के बड़े संघर्ष को सुलझाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.

यह संघर्ष इसी वर्ष फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार शाम अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर इस समझौते के पूरा होने की पुष्टि की. इससे ठीक पहले, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी स्थानीय समयानुसार सोमवार तड़के इसकी घोषणा की.

इस सहमति पत्र (एमओयू) पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे.

इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने का आव्हान किया गया है.  ईरान के अनुसार, सभी सैन्य अभियान सोमवार रात से ही रुक जाएंगे.

लेबनान का गतिरोध और इजरायल का रुख

इस युद्ध का सबसे भयानक असर लेबनान पर पड़ा, जहाँ ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी हमलों में हजारों लोग मारे गए और 12 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए. हिज़्बुल्लाह ने मार्च में ईरान के समर्थन में इजरायल पर हमले शुरू किए थे.

वार्ता में लेबनान एक सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ था क्योंकि इजरायल और हिज़्बुल्लाह दोनों ने ट्रम्प की शांति अपीलों को नजरअंदाज कर दिया था. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा कि लेबनान पर इजरायली हमले पूरी तरह रुकने चाहिए और इसे लागू करने की जिम्मेदारी अमेरिका की है. दूसरी तरफ, इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से अपनी सेना हटाने के किसी भी दबाव का कड़ा विरोध करेगा. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

जलमार्ग का खुलना और आर्थिक प्रभाव

राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की है कि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य शुक्रवार से खोल दिया जाएगा.  इसके साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी हटाने का भी आदेश दिया है. इस खबर के आते ही वैश्विक बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई; ब्रेंट क्रूड वायदा में 4% की गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई.

राजनीतिक दबाव और परमाणु कार्यक्रम का भविष्य

यह युद्ध ट्रम्प के लिए घरेलू स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक बोझ बन चुका था, क्योंकि अमेरिकी जनता ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान थी, जिसका असर नवंबर के मध्यावधि चुनावों पर पड़ सकता था. हालांकि, ट्रम्प पर अपनी ही पार्टी के उन सदस्यों का भारी दबाव है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करवाना चाहते हैं.

विवाद का मुख्य कारण यह है कि ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से अमेरिका को बाहर कर लिया था, जिसके जवाब में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन तेज करके लगभग 400 किलोग्राम बम बनाने योग्य सामग्री तैयार कर ली है. अब 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान प्रतिबंधों में ढील और परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर आगे बातचीत होगी.

संपत्तियों की रिहाई और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

वित्तीय राहत: इस समझौते के तहत अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई 25 अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करने पर सहमत हुआ है.

यूरेनियम पर सहमति: जहाँ अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह समझौता अंततः ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करेगा, वहीं ईरानी अधिकारियों के अनुसार, समझौते के मसौदे के तहत ईरान को अपने ही देश के भीतर अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कमजोर (डाइल्यूट) करने की अनुमति होगी.

वैश्विक स्वागत: मध्य-पूर्व से बाहर ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली और चीन जैसे देशों ने इस शांति पहल का स्वागत किया है. यूरोपीय देशों ने कहा है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट और सत्यापन योग्य कदमों के बदले प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं.

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