मर्ज़ को ठीक करने के बजाय लक्षणों पर ध्यान : नीट को लेकर प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा ‘टेलीग्राम’

नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा ‘टेलीग्राम’ ऐप को प्रतिबंधित किए जाने का मामला अब कानूनी और तकनीकी विवाद में बदल गया है. इस फैसले के विरोध में टेलीग्राम ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, तो वहीं सोशल मीडिया पर सरकार के इस तर्क को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों और किशोर व्हिसलब्लोअर्स ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि मर्ज़ को ठीक करने के बजाय लक्षणों और दिखावे पर ध्यान देने से समस्या अंततः और गंभीर हो जाती है.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत एक आपातकालीन निर्देश जारी कर 17 जून से 22 जून तक भारत में टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है. इसके अतिरिक्त, एक अन्य आदेश के जरिए प्लेटफॉर्म को पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के लिए 'मैसेज-एडिटिंग' (संपादित करने की) सुविधा को 30 जून तक रोकने का निर्देश दिया गया है.

‘एजेंसियों और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, इस सरकारी प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. टेलीग्राम के अधिवक्ता माधव खोसला ने न्यायमूर्ति तेजस कारिया की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष दलील दी कि अचानक लगाए गए प्रतिबंध से भारत के 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता सीधे प्रभावित हुए हैं और वर्तमान में भारतीय यूजर्स बिना वीपीएन के इस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. अदालत इस मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सहमत हो गई है.

सरकार और जांच अधिकारियों का दावा है कि 21 जून को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा से पहले सुरक्षा पुख्ता करना जरूरी था. पूर्व में मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने और भारी अनियमितताओं के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. अधिकारियों को अंदेशा था कि टेलीग्राम चैनलों का उपयोग लीक या फर्जी प्रश्नपत्रों को साझा करने, नकल गिरोहों का समन्वय करने और मैसेज-एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग करके संदेशों के वास्तविक समय में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है.

यह प्रशासनिक विवाद तब पूरी तरह तकनीकी बहस में बदल गया जब आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने सरकार के कदम का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि टेलीग्राम में एक ऐसी 'विशेष विशेषता' है जिससे कोई भी व्यक्ति बिना कोई सुराग या रिकॉर्ड छोड़े फर्जी पेपर लीक की खबर फैला सकता है और मैसेज एडिट करने पर पुराना इतिहास छिप जाता है.

निदेशक अग्रवाल के इस दावे को दो किशोर डेवलपर्स और व्हिसलब्लोअर्स—सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी—ने तकनीकी स्तर पर पूरी तरह खारिज कर दिया.

तकनीकी चुनौती: निसर्ग अधिकारी ने सरकार की नीति पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि सरकार पेपर लीक रोकने में नाकाम रही और अंततः टेलीग्राम को ही ब्लॉक कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि टेलीग्राम की बनावट ऐसी है कि इसे पूरी तरह ब्लॉक करना नामुमकिन है क्योंकि लोग प्रॉक्सी और बाईपास विधियों से इसका उपयोग आसानी से कर सकते हैं.

'म्याऊ म्याऊ' फैक्ट-चेक: सार्थक सिद्धांत ने इस बहस को और धार देते हुए मनिंद्र अग्रवाल के दावों की पोल खोल दी. उन्होंने एक "म्याऊ म्याऊ" संदेश का लाइव प्रदर्शन किया और स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें साफ दिख रहा था कि टेलीग्राम पर संपादित किए गए हर संदेश और यहाँ तक कि पीडीएफ फाइलों के बदले जाने पर भी उसका सटीक टाइमस्टैम्प और 'एडिट हिस्ट्री' दिखाई देती है. सार्थक ने इसे "IIT-K निदेशक का फैक्ट-चेक" नाम दिया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

व्हिसलब्लोअर्स और अन्य आईटी विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि अगर किसी संचार माध्यम में गलत जानकारी फैलती है, तो पूरे माध्यम को बंद कर देना हास्यास्पद है. सार्थक ने पूछा कि क्या व्हाट्सएप, एक्स या खुद भारतीय मीडिया में गलत खबरें नहीं चलतीं? तो क्या सरकार असहमति और संवाद के हर माध्यम को बंद करके एक मूक समाज बनाना चाहती है?

प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के अनुसार, टेलीग्राम का उपयोग सिर्फ चैटिंग के लिए नहीं होता. यह एक ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म है जिस पर हजारों शैक्षणिक समूह, व्यावसायिक संगठन, डेवलपर कम्युनिटी और एआई आधारित सेवाएं निर्भर हैं. इस अचानक लगे प्रतिबंध से उनका कामकाज ठप हो गया है. आलोचकों का अंतिम निष्कर्ष है कि जब तक देश में वीपीएन और अन्य वैकल्पिक मैसेजिंग ऐप्स मौजूद हैं, तब तक किसी एक ऐप को बैन करने से परीक्षा लीक और फर्जी खबरों की बुनियादी समस्या का कोई समाधान नहीं होने वाला.

Previous
Previous

प्रो. संतोष मेहरोत्रा | रोजगार कहीं अधिक पैदा हो सकता था, अगर सरकार ने समग्र औद्योगिक नीति अपनाई होती

Next
Next

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तंज़: ‘चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ित के घर पर ताला लगाने की चाल’