मुस्लिम संगठनों द्वारा ध्वस्तीकरण कार्रवाई की निंदा और कानूनी लड़ाई का ऐलान
विभिन्न प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों और मुस्लिम घरों को ढहाए जाने की सिलसिलेवार घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है.
ज़िया उस सलाम के अनुसार, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने इस "बुलडोजर राजनीति" की तुलना अघोषित आपातकाल से करते हुए कहा कि कानून की अनदेखी कर धार्मिक और आवासीय स्थलों को तोड़ना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय करने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है, सरकार को नहीं. जमात-ए-इस्लामी हिंद ने भी इसका समर्थन करते हुए पीड़ितों को हर स्तर पर कानूनी सहायता देने का भरोसा दिया.
दूसरी ओर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अल्पसंख्यकों को सामाजिक-राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने और भाजपा शासित राज्यों में बढ़ती भीड़ हिंसा की घटनाओं पर दुख जताया. बोर्ड ने इसके खिलाफ अन्य समुदायों के न्यायप्रिय लोगों के साथ मिलकर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए एक 'एक्शन कमीशन' के गठन की घोषणा की है.
अल्पसंख्यक नेताओं का मानना है कि यह कार्रवाई 2014 के बाद से लागू किए जा रहे एक बड़े वैचारिक एजेंडे का हिस्सा है. इन संगठनों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए रखने और न्याय पाने के उद्देश्य से राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दायर करने का निर्णय लिया है.

