विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत छह स्थान फिसला, पाकिस्तान पांच पायदान ऊपर चढ़ा
भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) द्वारा प्रकाशित विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर खिसक गया है. पिछले साल वैश्विक मीडिया स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 151वें स्थान पर था. भारत का परमाणु-संपन्न पड़ोसी देश पाकिस्तान 153वें स्थान पर है, जो पिछले साल के 158वें स्थान से बेहतर हुआ है.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, नॉर्वे लगातार 10वें वर्ष पत्रकारों के लिए सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि इरिट्रिया लगातार तीसरे वर्ष अंतिम स्थान पर है.
आरएसएफ ने कहा कि उसने यह सूची ऐसे समय में जारी की है जब "प्रेस पर राजनीतिक दबाव तेज हो रहा है, अधिनायकवादी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं और मीडिया बाजार काफी कमजोर हो गया है."
संस्था ने आगे कहा, "इस वर्ष के सूचकांक का विश्लेषण दुनिया के कई हिस्सों में पत्रकारिता की स्थितियों में चिंताजनक गिरावट को उजागर करता है. हालांकि कुछ छिटपुट सुधार भी हुए हैं, लेकिन 180 में से 100 देशों और क्षेत्रों के प्रेस स्वतंत्रता स्कोर में गिरावट देखी गई है."
आरएसएफ ने कहा कि भारत में, "स्वतंत्र मीडिया का न्यायिक उत्पीड़न तेज हो रहा है, जिसका मुख्य कारण आपराधिक कानूनों—जिनमें मानहानि और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून शामिल हैं—का बढ़ता उपयोग है, जो सीधे तौर पर पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं."
पाकिस्तान में प्रेस "एक तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल के बीच प्रतिबंधों की निरंतर लहरों का सामना कर रही है, जिसमें अधिकारी पत्रकारिता सामग्री के प्रसार को नियंत्रित करने और कुछ मामलों में दबाने की कोशिश करते हैं," RSF ने कहा।
अमेरिका को 64वें स्थान पर रखा गया है, जो पिछले साल के 57वें स्थान से नीचे है. इस पर आरएसएफ का कहना है: "...पत्रकार जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों और जनता के भरोसे के संकट से जूझ रहे थे, वे अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा राज्य संस्थानों के व्यवस्थित उपयोग का भी सामना कर रहे हैं. इसमें एनपीआर और पीबीएस जैसे सार्वजनिक प्रसारकों के फंड में कटौती, मीडिया स्वामित्व में राजनीतिक हस्तक्षेप, और नापसंद किए जाने वाले पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित जाँच शामिल हैं."
आरएसएफ के अनुसार, ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से, "विरोध प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया है, जो उस व्यापक गिरावट को दर्शाता है जो आधुनिक अमेरिकी इतिहास में प्रेस स्वतंत्रता के सबसे गंभीर संकटों में से एक है."
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के इतिहास में पहली बार, आरएसएफ ने कहा, "दुनिया के आधे से अधिक देश अब प्रेस स्वतंत्रता के लिए 'कठिन' या 'अत्यंत गंभीर' श्रेणियों में आते हैं. 25 वर्षों में, सूचकांक में शामिल सभी 180 देशों और क्षेत्रों का औसत स्कोर कभी इतना कम नहीं रहा है."
संस्था ने आगे जोड़ा: "2001 के बाद से, तेजी से प्रतिबंधात्मक कानूनी शस्त्रागार के विस्तार—विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों से जुड़े कानूनों—ने लोकतांत्रिक देशों में भी सूचना के अधिकार को लगातार कमजोर किया है. सूचकांक के कानूनी संकेतक में पिछले एक साल में सबसे अधिक गिरावट आई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुनिया भर में पत्रकारिता का अपराधीकरण बढ़ता जा रहा है."

