इजरायल के चुनाव आयोग ने खारिज किए नेतन्याहू के धाँधली के दावे, गादी आइज़ेनकोट बना सकते हैं सरकार

‘द गार्डियन’ के मुताबिक, इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह हुए मतदान के अंतिम नतीजों की पुष्टि करते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा लगाए गए बड़े पैमाने पर चुनावी धाँधली के दावों को खारिज कर दिया है. इन परिणामों के साथ ही नेतन्याहू के अति-दक्षिणपंथी गठबंधन ने अपना बहुमत खो दिया है. चुनाव समिति के अध्यक्ष नोम सोहलबर्ग ने स्पष्ट किया कि जाँच में ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली जो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए.

विपक्ष की बढ़त और गादी आइज़ेनकोट की दावेदारी

मुख्य विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर सत्ता में बने रहने के लिए "लोकतंत्र के खिलाफ हिंसा" चलाने और सुरक्षा बलों का राजनीतिक दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. आइज़ेनकोट—जिन्होंने गाजा युद्ध में अपने बेटे को खोया है—को सभी यहूदी विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है. नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए फिलिस्तीनी-नेतृत्व वाले दल भी उनका समर्थन कर सकते हैं.

राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग द्वारा आइज़ेनकोट को सरकार बनाने का पहला अवसर दिए जाने की संभावना है. परिणाम सौंपे जाने के दौरान राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने चुनाव अभियान के दौरान इजरायल के अरब/फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल की गई नस्लवादी भाषा और हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की.

सुरक्षा सेवाओं के दुरुपयोग का प्रयास विफल

नेतन्याहू द्वारा नियुक्त 'शिन बेट' सुरक्षा सेवा के प्रमुख डेविड ज़िन्नी ने फिलिस्तीनी-नेतृत्व वाले दलों के वरिष्ठ राजनेताओं (जिनमें अहमद तिबी भी शामिल हैं) से कठोर सुरक्षा धाराओं के तहत पूछताछ की मांग की थी. हालाँकि, अटॉर्नी जनरल गॉली बहराव-मियारा ने इस माँग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि से पूछताछ नहीं की जा सकती. आइज़ेनकोट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "सरकारी अधिकारी और सुरक्षा बल राज्य के सेवक हैं, किसी राजा के नहीं."

चुनावी माहौल और तंज

विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू चुनाव नतीजों को अमान्य ठहराने के लिए और भी आक्रामक कदम उठा सकते हैं, जिससे देश की कानूनी व संवैधानिक व्यवस्था को खतरा हो सकता है. नेतन्याहू ने अरब मूल के नागरिकों (जो देश की आबादी का लगभग 20% हैं) को निशाना बनाते हुए धोखाधड़ी के निराधार दावों को हवा दी थी.

इस दौरान प्रमुख फिलिस्तीनी राजनेता अहमद तिबी ने अमेरिका में डेमोक्रैट्स की जीत और नेतन्याहू के लोकतंत्र के डर पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा— "अटॉर्नी जनरल इस बात की जाँच कर रही हैं कि दोनों जगह एक ही परिष्कृत तरीका अपनाया गया: लोग भारी संख्या में मतदान केंद्रों पर आए, वोट डाला और घर चले गए."

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