‘हमारे वोट कहाँ गए?’: बंगाल के न्यू टाउन के मतदाताओं का सवाल, जहाँ मुस्लिम बहुल बूथ पर भाजपा को मिले 97% वोट

पश्चिम बंगाल के राजारहाट न्यू टाउन निर्वाचन क्षेत्र के विधानसभा चुनाव परिणाम एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गए हैं. इस विवाद की मुख्य वजह बूथ संख्या 164 के असामान्य चुनावी आंकड़े और मतगणना प्रक्रिया के दौरान बरती गई कथित गोपनीयता है. ‘ऑल्ट न्यूज़’ को जनसांख्यिकी और चुनावी आंकड़ों में विसंगति मिली है. अंकिता, शिंजिनी और अंकित की लंबी रिपोर्ट का सारांश कहता है कि यह पूरा विवाद मुख्य रूप से 'मुसलमान पाड़ा' इलाके के दो पड़ोसी पोलिंग बूथों (164 और 165) के परिणामों के इर्द-गिर्द घूमता है:

बूथ 164 पर कुल 88% मतदाता मुस्लिम हैं. यहाँ पड़े कुल 656 वोटों में से भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोडिया को 637 (97%) वोट मिले, जबकि टीएमसी उम्मीदवार तापस चटर्जी को सिर्फ 5 और माकपा-आईएसएफ गठबंधन के सप्तरर्षि देब को केवल 1 वोट मिला. बूथ 165 की स्थिति: इसी मुस्लिम बहुल इलाके और एक ही परिवारों के मतदाताओं वाले इस पड़ोसी बूथ पर समीकरण बिल्कुल अलग था. यहाँ भाजपा को सिर्फ 32 वोट मिले, जबकि माकपा-आईएसएफ को 299 और टीएमसी को 290 वोट प्राप्त हुए.

17वें दौर की मतगणना तक टीएमसी उम्मीदवार 316 वोटों से आगे चल रहे थे. लेकिन आखिरी 18वें दौर में, जिसमें केवल बूथ 164 की गिनती हुई, पूरा परिणाम पलट गया और भाजपा उम्मीदवार ठीक 316 वोटों से चुनाव जीत गए.

‘ऑल्ट न्यूज़’ की जमीनी पड़ताल में स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इन नतीजों को पूरी तरह से असंभव और बेतुका बताया. क्षेत्र के माकपा पंचायत सदस्य अहमद अली मोंडल और आईएसएफ नेता अख्तर अली मुल्ला ने कहा कि उनके अपने बड़े परिवारों (8-9 सदस्यों) और पोलिंग एजेंटों ने खुद बूथ 164 पर गठबंधन को वोट दिया था, फिर भी आधिकारिक आंकड़ों में केवल 1 वोट दिखना समझ से परे है.

टीएमसी के बूथ अध्यक्ष मोक्शेद मोंडल ने भी नतीजों को "चौंकाने वाला" बताया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में भाजपा का कोई खास चुनाव प्रचार या प्रभाव नहीं था.

माकपा-आईएसएफ गठबंधन के उम्मीदवार सप्तरर्षि देब ने भी मतगणना के दौरान हुई कई संदेहास्पद घटनाओं को उजागर किया. मसलन, शुरुआत में केवल 17 राउंड की मतगणना तय थी, लेकिन बूथ 164 की ईवीएम में मतदान के दिन दर्ज हुए 52 अतिरिक्त वोटों के विवाद के कारण 18वां राउंड जोड़ा गया.

देब का आरोप है कि 4 मई की रात 11 बजे तक टीएमसी आगे थी. अगले दिन सुबह उन्हें फोन पर दोबारा मतगणना की सूचना मिली, लेकिन केंद्र पर उम्मीदवारों या उनके एजेंटों को जाने नहीं दिया गया.  कथित तौर पर केवल भाजपा उम्मीदवार को अंदर रहने की अनुमति मिली.

चुनावी नतीजों का आधिकारिक विवरण यानी 'फॉर्म 20' उम्मीदवारों को नियमानुसार दो दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे लगभग दो सप्ताह बाद जारी किया.

लगाए जा रहे आरोपों पर भाजपा विधायक पीयूष कनोडिया और उनके कार्यकर्ताओं ने साफ किया है कि जनता ने उन्हें वोट दिया है और नतीजे खुद सच्चाई बयां करते हैं. कनोडिया ने विपक्षी दलों के हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें "मूर्खों की दुनिया में जीने वाला" बताया और रिकाउंटिंग के दौरान अकेले अंदर मौजूद होने के दावे को पूरी तरह से गलत करार दिया.

कुलमिलाकर, ‘ऑल्ट न्यूज़’ की यह पड़ताल रेखांकित करती है कि न्यू टाउन का चुनावी नतीजा एक मुस्लिम बहुल बूथ पर भाजपा को मिले अप्रत्याशित एकतरफा वोट और मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण कानूनी और नैतिक विवादों के घेरे में है. विपक्षी दल अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं.

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