पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में कुछ लोगों के एक समूह ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें अपना धर्म छोड़ने की धमकी दी. इसके साथ ही उन पर जबरन धार्मिक अनुष्ठान कराने का भी आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को ‘पीटीआई’ को बताया कि पीड़ित परिवार पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और करीब 18 महीने पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने पुलिस से यह भी शिकायत की है कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है.
अधिकारी ने बताया कि चंद्रकोणा में रहने वाले इन परिवारों के नौ सदस्यों ने अपनी पुलिस शिकायत में दावा किया है कि उस समूह ने 18 और 19 अक्टूबर को उनके साथ मारपीट की और यदि उन्होंने ईसाई धर्म नहीं छोड़ा तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी.
पुलिस शिकायतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "खबर है कि मारपीट के बाद एक परिवार की महिला बेहोश हो गई. दूसरे परिवार की एक लड़की के साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई और उसे धमकी दी गई. उन पर यह भी आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया."
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी समूह ने कथित तौर पर परिवारों को इस मामले में पुलिस के पास न जाने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा, "परिवारों द्वारा अपनी शिकायत में नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. जांच के हित में हम नाम का खुलासा करने में असमर्थ हैं." उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित परिवारों के सभी नौ सदस्यों को पुलिस थाने लाया गया, जहां उन्होंने शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस अधिकारी ने कहा, "वे वापस घर चले गए हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उनके इलाके में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं. स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है."
उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह घटना किसी स्थानीय विवाद, पुरानी पारिवारिक रंजिश या किसी अन्य कारण से जुड़ी है. उन्होंने आगे कहा, "हम सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं. हमें यह नहीं पता कि आरोपी लोग किस राजनीतिक दल से जुड़े हैं. जांच पूरी होने के बाद हम हर संभव विवरण सामने लाएंगे." इस मामले में कलेक्टर (डीएम) बिजीन कृष्णा की टिप्पणी हासिल करने के लिए उनको कई कॉल लगाए गए और मैसेज किए गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
यह घटना बंगाल के एक ईसाई अधिकार संगठन 'बंगिया क्रिश्चिया परिसेवा' (बीसीपी) द्वारा चर्चों और प्रार्थना सभाओं पर कथित हमलों को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के आग्रह के कुछ सप्ताह बाद सामने आई है. संगठन ने राज्य सरकार पर इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया था.
संगठन ने दावा किया था कि जबरन धर्मांतरण के निराधार आरोपों के तहत हमलों, तोड़फोड़ और पूजा स्थलों को अपवित्र किए जाने की घटनाएं आम हो गई हैं.
'इंडिया हेट लैब' (आईएचएल) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के शुरुआती चार महीनों में बंगाल में ईसाइयों को निशाना बनाकर कम से कम 60 कथित नफरत भरे अपराध (हेट क्राइम) हुए हैं, जिनमें से अधिकांश रिपोर्ट किए गए हमले दक्षिण 24 परगना और पश्चिम मेदिनीपुर में हुए हैं.

