महात्मा गांधी की हत्या में दोषी नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे: सावरकर के रिश्तेदार ने पुणे अदालत को बताया
दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर को कथित तौर पर बदनाम करने के आरोप में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मुकदमे में एक उल्लेखनीय मोड़ आया है. विनायक सावरकर के परपोते सत्यकी ने पुणे की विशेष सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत को बताया कि उनके नाना गोपाल गोडसे और 1948 में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 'सक्रिय' सदस्य थे.
नरसी बेनवाल की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा लंदन में दिए गए एक भाषण में उनके दादा (पिता के चाचा) सावरकर को बदनाम करने का आरोप लगाने वाले सत्यकी से विशेष अदालत में राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार द्वारा जिरह की जा रही है.
विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे के समक्ष सोमवार (17 अगस्त) को जारी अपनी जिरह के दौरान, सत्यकी ने स्वीकार किया कि उनकी मां गोपाल गोडसे की बेटी थीं, जो नाथूराम गोडसे के सगे भाई थे. उन्होंने स्वीकार किया कि गोडसे और सावरकर दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार थे. उन्होंने विशेष अदालत को बताया कि नाथूराम के अलावा गोपाल और सावरकर भी महात्मा गांधी की हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए थे.
अदालत ने दर्ज किया, "यह कहना सही है कि मेरे नाना गोपालराव गोडसे और विनायक सावरकर उक्त हत्या के मामले में आरोपी थे. यह कहना सही है कि मेरे नाना (चचेरे) नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को उस समय गोली मार दी थी जब वे प्रार्थना के लिए बिड़ला हाउस, दिल्ली जा रहे थे. गवाह ने अपनी ओर से यह भी कहा कि महात्मा गांधी को गोली लगने के बाद, वे लगभग 20 मिनट तक बिना किसी देखभाल के वहीं पड़े रहे. कोई भी उन्हें पास के अस्पताल नहीं ले गया. यह गांधीजी के प्रति उस समय की सरकार की उदासीनता थी."
इसके अलावा, सत्यकी ने बताया कि महात्मा गांधी हत्या कांड में आरोपी नंबर 1 नाथूराम गोडसे, आरोपी नंबर 2 नारायण आप्टे, आरोपी नंबर 3 विष्णु करकरे, आरोपी नंबर 4 मदनलाल पाहवा, आरोपी नंबर 5 शंकर किस्तय्या, आरोपी नंबर 6 गोपाल गोडसे, आरोपी नंबर 7 विनायक दामोदर सावरकर और आरोपी नंबर 8 डॉ. डी.एस. परचुरे थे.
सत्यकी ने न्यायाधीश को बताया, "यह कहना सही है कि इन आरोपियों में से नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई गई थी. यह कहना सही है कि गोपाल गोडसे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और सजा काटने के बाद वे रहने के लिए पुणे आ गए थे. यह कहना सही है कि वे लगभग 35 वर्षों तक पुणे में रहे और पुणे में ही उनका निधन हुआ. यह कहना सही है कि पुणे में रहते हुए गोपाल गोडसे ने समाचार पत्रों में लेख लिखे और किताबें भी लिखीं."
सत्यकी के वकील संग्राम कोल्हाटकर द्वारा उठाई गई इस आपत्ति पर कि उनके मुवक्किल से पूछे जा रहे सवाल इस मामले से संबंधित नहीं हैं, अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे का फैसला सुनवाई (ट्रायल) के समय करेगी.
सत्यकी ने आगे गवाही दी, "यह कहना सही है कि मेरे नाना गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे. मुझे नहीं पता कि गोपाल गोडसे ने 28 जनवरी 1994 को 'फ्रंटलाइन' मासिक पत्रिका को एक साक्षात्कार दिया था. मुझे नहीं पता कि नाथूराम नाथूराम गोडसे ने वर्ष 1944 में 'बौद्धिक प्रमुख' के रूप में काम किया था. मुझे नहीं पता कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे प्रमुख माधव सदाशिव गोलवलकर और दिगंबर बड़गे को भी महात्मा गांधी हत्या कांड में आरोपी बनाया गया था. मुझे नहीं पता कि दिगंबर बड़गे को 31 जनवरी 1948 को पुणे से महात्मा गांधी हत्या कांड में गिरफ्तार किया गया था. मुझे नहीं पता कि दिगंबर बड़गे ने महात्मा गांधी हत्या कांड में क्षमादान (सरकारी गवाह बनना) की याचिका दी थी. यह कहना सही है कि नाथूराम गोडसे हिंदू महासभा राजनीतिक दल के सदस्य थे."
जिरह के दौरान, सत्यकी ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पत्नी और नाना 'हिंदू महासभा पार्टी' के सदस्य थे, जिसके बारे में उन्होंने पुष्टि की कि यह आज भी एक राजनीतिक दल है. उन्होंने आगे पुष्टि की कि अंडमान जेल से रिहा होने के बाद सावरकर ने 1937 से 1943 की अवधि के दौरान हिंदू महासभा पार्टी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था. जिरह 1 सितंबर को भी जारी रहेगी.

