‘उम्मीद के मुताबिक’: भारत में ‘एक्स’ अकाउंट पर रोक लगने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक की प्रतिक्रिया

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत द्वारा भारतीय युवाओं के कुछ वर्गों को लेकर की गई टिप्पणियों के जवाब में ऑनलाइन शुरू हुए एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान के कुछ ही दिनों बाद, कॉकरोच जनता पार्टी के ‘एक्स’ (ट्विटर) अकाउंट पर भारत में रोक लगा दी गई है.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, यह अकाउंट CJP_2029 यूजरनेम से चल रहा था, जिस पर अब भारत में "अकाउंट विदहेल्ड" (खाते पर रोक) का नोटिस दिख रहा है. इस नोटिस में लिखा है: “एक कानूनी मांग के जवाब में @CJP_2029 पर भारत में रोक लगा दी गई है.”

इस घटनाक्रम की पुष्टि अभियान के संस्थापक अभिजीत दिपके ने की, जो एक 30 वर्षीय राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पॉप-अप संदेश का एक स्क्रीनशॉट साझा किया.

दिपके ने स्क्रीनशॉट के साथ कैप्शन में लिखा, “उम्मीद के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी के अकाउंट पर भारत में रोक लगा दी गई है.”

‘एक्स’ (ट्विटर) के अनुसार, जब प्लेटफॉर्म को किसी "अधिकृत संस्था से वैध और उचित दायरे में अनुरोध" प्राप्त होता है, तो खातों पर रोक लगाई जा सकती है.

प्लेटफॉर्म ने कहा, “इस तरह की रोक केवल उसी विशिष्ट क्षेत्राधिकार तक सीमित होगी जिसने वैध कानूनी मांग जारी की है या जहाँ सामग्री को स्थानीय कानून (कानूनों) का उल्लंघन करते हुए पाया गया है.”

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पहली बार 16 मई 2026 को एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन के रूप में ऑनलाइन सामने आई थी. ऐसा तब हुआ जब 15 मई को एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा की गई टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भारी आक्रोश फैल गया था.

सोशल मीडिया पर एक वकील के आचरण का जिक्र करते हुए, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था: “कुछ ऐसे युवा हैं, जो कॉकरोच (तिलचट्टों) की तरह हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता या पेशे में कोई जगह नहीं मिलती. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं, और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.”

इन टिप्पणियों की ऑनलाइन काफी आलोचना हुई और इसके बाद दिपके के नेतृत्व में सीजेपी अभियान की शुरुआत हुई, जिसने खुद को बेरोजगारी, संस्थागत अलगाव और युवा आवाजों पर होने वाले हमलों के खिलाफ एक विरोध आंदोलन के रूप में पेश किया.

जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में 16 मई को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक हिस्से द्वारा उनके बयान को "गलत तरीके से पेश" किया गया था.

अभिजीत दिपके के बारे में

अभिजीत दिपके ने उच्च शिक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जाने से पहले पुणे में पत्रकारिता की पढ़ाई की थी. बाद में उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में मास्टर डिग्री पूरी की.

साल 2020 और 2022 के बीच, उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) की सोशल मीडिया टीम के साथ एक स्वयंसेवक (वॉलंटियर) के रूप में काम किया था.

यद्यपि सीजेपी शुरुआत में कई यूजर्स को एक और कम समय तक चलने वाले 'मीम पेज' की तरह लगा था, लेकिन यह अभियान तेजी से एक व्यापक डिजिटल आंदोलन में बदल गया. यह आंदोलन बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, राजनीतिक जवाबदेही और संस्थाओं व जेन जी (आज की युवा पीढ़ी) के बीच बढ़ते अलगाव को लेकर युवाओं की निराशा पर केंद्रित था.

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