‘जनगणना से पहले एनआरसी’: मणिपुर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन, दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान

'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) स्टूडेंट विंग' ने राज्य में जनगणना शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की मांग को लेकर 17 अगस्त की मध्यरात्रि से मणिपुर में दो दिवसीय आम हड़ताल की घोषणा की है.

जनगणना 2027 का मकान सूचीकरण (हाउस-लिस्टिंग) चरण 17 अगस्त से स्व-गणना के साथ शुरू हो रहा है. मुख्य मकान सूचीकरण कार्य इस वर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर तक निर्धारित है.

यह हड़ताल इम्फाल और घाटी के जिलों में जनगणना की तैयारियों के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच बुलाई गई है. छात्रों, बाजार निकायों और नागरिक समाज संगठनों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है और इसका बहिष्कार करने की चेतावनी दी है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इस आम हड़ताल को कई नागरिक समाज संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमें यूनाइटेड मैतेई नागा कमेटी मणिपुर, फेडरेशन ऑफ नागा सिविल सोसाइटी (एफएनसीसी), चंदेल नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन, यूनाइटेड मैतेई पांगल कमेटी और नेटिव पीपुल्स कमेटी मणिपुर शामिल हैं.

जेएफडी ने जनता से इस दो दिवसीय हड़ताल का समर्थन करने की अपील की है, जिसका उद्देश्य अधिकारियों पर जनगणना से पहले एनआरसी कराने का दबाव बनाना है.

एनआरसी के लिए जेएफडी की मांग के समर्थन में कई नागरिक समाज निकायों ने सोमवार को इम्फाल घाटी में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया. यह आंदोलन विशेष रूप से राज्य के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्र ख्वैरामबंद कैथेल में देखने को मिला, जो तीन महिला बाजारों द्वारा जनसभाएं आयोजित करने और उसके बाद विरोध के समर्थन में बंद करने के बाद बंद रहा.

डीएम यूनिवर्सिटी परिसर में भी तनाव की खबरें आईं, जहां डीएम कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन और हिंदी टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में जनगणना से जुड़े प्रशिक्षण को रोकने की कोशिश के दौरान छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई. इस बीच, क्वाकेथेल से एक बड़ी छात्र रैली शुरू हुई और केसमपत की ओर बढ़ी. छात्र जनगणना का विरोध करते हुए नारे लगा रहे थे और इसके सामूहिक बहिष्कार का आह्वान कर रहे थे.

इम्फाल के सीसी हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों ने उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में शामिल हुए ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन (एएमएसयू) ने भारत और म्यांमार के बीच जमीन की संभावित अदला-बदली की खबरों का भी विरोध किया. एएमएसयू सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि ऐसे किसी भी कदम से मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित हो सकती है.

इम्फाल घाटी में कई स्थानों से विरोध प्रदर्शनों की सूचना मिली, जिससे सामान्य गतिविधियां बाधित हुईं और कई संवेदनशील बिंदुओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ानी पड़ी.

नागरिक निकायों के एक समूह जेएफडी ने मांग की है कि 1951 को कट-ऑफ वर्ष मानते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान होने तक राज्य में किसी भी प्रकार की जनगणना संबंधी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.

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