श्रवण गर्ग | इंडिया ब्लॉक में दरार के बाद राहुल गांधी अकेले कैसे लड़ेंगे?

'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने 30 सितंबर को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संबंधों तथा उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इसके संभावित असर को लेकर चर्चा की. बातचीत में गर्ग ने इस घटनाक्रम को केवल आगामी विधानसभा चुनाव या सीटों के बंटवारे तक सीमित करके देखने के बजाय इसके व्यापक राजनीतिक संदर्भ को समझने की जरूरत बताई.

श्रवण गर्ग के मुताबिक, अखिलेश यादव का बैठक में शामिल न होना विपक्षी राजनीति की एक महत्वपूर्ण घटना है, जिस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि वह इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि अखिलेश अपनी मर्जी से गठबंधन से दूरी बना रहे हैं. उनके आकलन में अखिलेश पर अचानक कोई बड़ा दबाव पैदा हुआ हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटनाक्रम को केवल उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा. उनके अनुसार, अगले चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं.

गर्ग ने समाजवादी पार्टी की ओर से एक उद्योगपति से जुड़े व्यक्ति को राज्यसभा भेजे जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि यदि उस व्यक्ति को राज्यसभा भेजना ही था, तो यह जिम्मेदारी एनडीए के किसी घटक दल के बजाय समाजवादी पार्टी के माध्यम से क्यों पूरी हुई. गर्ग का संदेह है कि इसके पीछे केवल विपक्षी गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के सांसदों को अपने पक्ष में करने की रणनीति भी हो सकती है. उन्होंने इसे अपनी आशंका और राजनीतिक आकलन के रूप में प्रस्तुत किया.

संभावित राजनीतिक परिदृश्यों पर चर्चा करते हुए गर्ग ने मध्यावधि लोकसभा चुनाव और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की संभावना का उल्लेख किया. उन्होंने आशंका जताई कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन जैसे मुद्दों पर भी कदम उठाए जा सकते हैं. उनके मुताबिक, विपक्षी दलों की मौजूदा स्थिति को समझते समय केवल उनकी एकजुटता ही नहीं, बल्कि सरकार की संभावित रणनीति पर भी ध्यान देना चाहिए.

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर उभर रहे मतभेदों की तुलना करते हुए गर्ग ने बिहार में नीतीश कुमार के इंडिया गठबंधन छोड़ने का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि उस समय भी सीट बंटवारे को लेकर असहमति को गठबंधन छोड़ने की वजह बताया गया था. गर्ग के अनुसार, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से बने राजनीतिक माहौल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच समझौते की जमीन तैयार करने में भूमिका निभाई थी.

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बात करते हुए गर्ग ने सवाल उठाया कि यदि अखिलेश यादव का फैसला चुनावी रणनीति का हिस्सा है, तो इसका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा की राजनीति पर क्या असर होगा. उन्होंने यह संभावना भी जताई कि राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रूप से उलझाना किसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है. ये उनके अनुमान और आशंकाएं थीं, न कि बातचीत में प्रमाणित तथ्य.

बातचीत के अंत में गर्ग ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य में होने वाले राजनीतिक बदलावों का असर केंद्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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