आईआईटी-बॉम्बे छात्र आत्महत्या: जातिगत भेदभाव के आरोपी प्रोफेसर डीन पद से निलंबित
'स्क्रोल' की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी-बॉम्बे ने छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद जातिगत भेदभाव के आरोपों से घिरे प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को डीन के पद से निलंबित कर दिया है. हालांकि, उन्हें शिक्षण कार्य से नहीं हटाया गया है और वे संस्थान के शिक्षक के रूप में काम करते रहेंगे.
20 वर्षीय साहिल वाकोडे के परिवार ने आरोप लगाया है कि दूल्ला ने करीब तीन महीने तक उनके बेटे के साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया. परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि यह कथित भेदभाव आईआईटी-बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे के निर्देश पर किया गया. साहिल की शुक्रवार को आत्महत्या से मौत हो गई थी.
आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी-एसटी एक्ट में मामला
शनिवार को मुंबई पुलिस ने दूल्ला और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है.
साहिल की मौत के बाद आईआईटी-बॉम्बे परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों ने 18 से अधिक मांगें संस्थान के सामने रखीं, जिनमें दूल्ला को प्रोफेसर पद से हटाने और निदेशक के इस्तीफे की मांग शामिल थी. संस्थान ने इन मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था.
परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल को लेकर विवाद
संस्थान ने शनिवार को कहा था कि परीक्षा के दौरान साहिल मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते और प्रश्नपत्र को कृत्रिम बुद्धिमत्ता चैटबॉट चैटजीपीटी पर डालकर जवाब तलाशते पाए गए थे. उस समय दूल्ला परीक्षा निरीक्षक थे. आईआईटी-बॉम्बे ने कहा था कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई और उसे समझाया गया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक भविष्य पर असर नहीं पड़ेगा.
हालांकि, साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को निलंबन की धमकी दी गई थी.
सोमवार को आईआईटी-बॉम्बे ने अपने पहले बयान पर खेद जताते हुए कहा कि साहिल की मौत से पहले की घटनाओं और परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं. संस्थान ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले घटनाओं का निश्चित विवरण देना उचित नहीं था.

