‘महिलाओं को दूर रखो’: मोदी समर्थित गुजरात के हिंदू समूह के माफी मांगने के बाद एफिल टॉवर फिर से खुला

‘फ्रांस 24’ के अनुसार, एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के दौरान महिला सहकर्मियों को हटाए जाने के विरोध में कर्मचारियों द्वारा किए गए काम के बहिष्कार (हड़ताल) के बाद मंगलवार को एफिल टॉवर फिर से खुल गया. इस घटना के बाद उक्त हिंदू समूह ने माफी मांग ली है.

एएफपी के पत्रकार ने बताया कि मंगलवार सुबह 9:30 बजे से ठीक पहले, पर्यटक टॉवर के निचले हिस्से में सुरक्षा जांच चौकियों से गुजर रहे थे. अपनी वेबसाइट पर एफिल टॉवर ने कहा कि यह ऐतिहासिक स्मारक "आज खुला है".

कर्मचारियों और प्रबंधन के अनुसार, कुछ दिन पहले एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को अलग किए जाने (हटाये जाने) से "स्तब्ध" पेरिस स्थित एफिल टॉवर के कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर चले गए थे.

सीजीटी ट्रेड यूनियन द्वारा जारी एक बयान में, कर्मचारियों ने "उन कार्यस्थल निर्देशों की कड़ी निंदा की, जिनके कारण लैंगिक आधार पर महिला कर्मचारियों को किनारे किया गया, बदला गया और अदृश्य बना दिया गया".

बयान में कहा गया, "कुछ महिलाओं को अपने पदों को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में जाने को कहा गया. कुछ पदों पर उनकी जगह पुरुषों को तैनात कर दिया गया. और सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि जब तक प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे, वे कुछ खास क्षेत्रों में न जाएं और न ही उन्हें पार करें."

यह दौरा बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) आध्यात्मिक आंदोलन द्वारा सीन नदी पर आयोजित एक सांस्कृतिक नौका जुलूस के समय हुआ था.

बीएपीएस, जो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्तारूढ़ रूढ़िवादी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी के करीब है, ने रविवार को पेरिस के पास फ्रांस में अपने पहले बड़े मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की थी.

पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में हड़ताल का समर्थन किया. उन्होंने महिला कर्मचारियों को अलग किए जाने को "अस्वीकार्य" और "उन मूल्यों के विपरीत बताया जिनका प्रतिनिधित्व एफिल टॉवर करता है". टॉवर, जिसकी वेबसाइट के अनुसार यहाँ हर साल लगभग 70 लाख पर्यटक आते हैं, सोमवार को पूरे दिन बंद रहा. फ्रांसीसी समानता मंत्री ऑरोर बर्गे ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा: "फ्रांस में, हम महिलाओं को खुद को मिटाने (अदृश्य होने) के लिए नहीं कहते हैं. कोई भी हठधर्मिता, कोई भी धर्म गणतंत्र के कानूनों से ऊपर नहीं है."

अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआती दौर की प्रमुख उम्मीदवार और कट्टरपंथी दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने भी इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि फ्रांस "कभी भी यह स्वीकार नहीं करेगा कि महिलाओं की उपस्थिति को 'सीमित' किया जाए."

राष्ट्रपति पद के एक अन्य उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री गेब्रियल अतल ने कहा कि "फ्रांस में, कोई भी संस्कृति, कोई भी विश्वास, कोई भी धर्म, कुछ भी और कोई भी आकर महिलाओं को यह हुक्म नहीं दे सकता कि उनका स्थान क्या होना चाहिए."

‘द वायर’ के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीएपीएस से संबंध रहा है. मोदी ने फ्रांस के पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन पर बधाई देते हुए इसे भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों का नया अध्याय बताया था. 19वीं सदी में गुजरात में स्थापित बीएपीएस संप्रदाय और इसके दिवंगत प्रमुख स्वामी महाराज के साथ पीएम मोदी का गहरा संबंध रहा है, जिसे वे "पिता-पुत्र जैसा" मानते हैं. वे 2002 से अपने सभी चुनावी नामांकन बीएपीएस द्वारा दिए गए पेन से ही करते आए हैं. वैश्विक स्तर पर बीएपीएस के मंदिर निर्माण की सराहना करते हुए उन्होंने अबू धाबी और पेरिस के मंदिरों को दुनिया में भारत के प्रभाव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना है.

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