जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक: कोर्ट ने जमानत की शर्त के रूप में मंदिर की सफाई का दिया आदेश
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले की एक अदालत ने सोशल मीडिया रील बनाते समय जूते पहनकर रथ पर चढ़ने और कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक मुस्लिम व्यक्ति को सशर्त जमानत दे दी है. अदालत ने उसे जाँच पूरी होने तक हर दिन मंदिर परिसर और उससे लगी सड़क की सफाई करने का निर्देश दिया है.
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, समुद्रगढ़ के निवासी बाबूलाल शेख को कालना में 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद हुई एक घटना को लेकर धार्मिक समिति 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सदस्यों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद नदानघाट पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर एक वीडियो सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें एक स्थानीय व्यक्ति जूते पहनकर खड़े एक रथ की सीढ़ियों पर चढ़कर नाचते हुए दिखाई दे रहा था.
शिकायत के अनुसार, शेख ने कथित तौर पर जूते पहनकर खड़े रथ की सीढ़ियों पर डांस किया और बाद में इस वीडियो को फेसबुक पर अपलोड कर दिया. यह वीडियो बाद में वायरल हो गया, जिसकी स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने आलोचना की.
एफआईआर के आधार पर, पुलिस ने शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया.
उसे कालना में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे कई शर्तों के अधीन जमानत दे दी.
अदालत के निर्देशों के अनुसार, शेख को जाँच पूरी होने तक हर दिन मंदिर परिसर और मंदिर के सामने की सड़क की सफाई करनी होगी. अदालत ने उसे हफ्ते में एक बार जाँच अधिकारी के सामने पेश होने और जाँच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया.
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अदालत ने शेख को पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में एक हफ्ते तक रथ की सीढ़ियों को धोने का आदेश दिया था. जमानत की शर्तों के अनुसार उसे जाँच पूरी होने तक मंदिर परिसर और उससे सटी सड़क को साफ रखना होगा.
स्थानीय लोगों ने कहा कि शेख ने अपने इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और यहाँ तक कि पछतावे में अपने कान भी पकड़े. हालाँकि, अदालत की शर्त ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं. कुछ वर्गों में यह आशंका थी कि एक मुस्लिम युवक को हिंदू धार्मिक रथ की सफाई करने का आदेश देने से एक नया विवाद खड़ा हो सकता है.

