आर्थिक संकट के बीच अपना जिम बंद कर सकते हैं ‘मोहम्मद दीपक’; भाजपा, बजरंग दल पर उत्पीड़न का आरोप
'मोहम्मद दीपक' के नाम से मशहूर दीपक कुमार ने कहा है कि उन्हें अपना जिम खाली करना पड़ सकता है और कोटद्वार से बाहर जाना पड़ सकता है. वे एक ऐसे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं जो एक मुस्लिम दुकानदार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के बाद से लगातार बढ़ता चला गया है.
'हल्क' जिम के 42 वर्षीय संचालक ने कहा कि उनके मकान मालिक ने पिछले चार महीनों का किराया न मिलने पर उन्हें अल्टीमेटम (अंतिम चेतावनी) दिया है. उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि "क्या बाहरी तत्वों ने मकान मालिक पर दबाव डाला" ताकि उन्हें जिम खाली करने के लिए मजबूर किया जा सके. दीपक ने ‘पीटीआई’ से कहा, "मेरे मकान मालिक ने मुझे अल्टीमेटम दिया है, क्योंकि मैं पिछले चार महीनों से किराया नहीं दे पाया हूँ. अब मैं जिम के उपकरण बेचने और नौकरी करने के लिए शहर से बाहर जाने के बारे में सोच रहा हूँ."
26 जनवरी को, दीपक ने उन बजरंग दल कार्यकर्ताओं का सामना किया था जो पटेल मार्ग पर 'बाबा' क्लोदिंग स्टोर के 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद से अपनी दुकान का नाम बदलने की मांग कर रहे थे. उस मुस्लिम दुकानदार के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जब दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने खुद को 'मोहम्मद दीपक' बताया. एक वायरल वीडियो में कुमार ने कहा था, "मैं हिंदू नहीं हूँ, मैं मुस्लिम नहीं हूँ, मैं सिख नहीं हूँ, और मैं ईसाई नहीं हूँ. सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, मैं एक इंसान हूँ."
31 जनवरी को, कपड़े की दुकान और कुमार के जिम के बाहर एक बड़ी भीड़ जमा हो गई, जिसने सड़क जाम कर दी और नारेबाज़ी की. पुलिस ने इन घटनाओं के संबंध में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं.
दीपक ने बताया कि उनके जिम में फिलहाल 60 से 65 सदस्य हैं और सदस्यों की यह संख्या जिम के संचालन के खर्चों को पूरा करने में नाकाफी है. उन्होंने कहा, "इस जगह का मासिक किराया 40,000 रुपये है." उन्होंने यह भी कहा कि भीषण गर्मी और चल रहे विवादों को देखते हुए जिम के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना बहुत कम है.
दीपक ने आरोप लगाया कि भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ता उनके ग्राहकों को निशाना बनाते हैं. उन्होंने कहा, "ये कार्यकर्ता उन जिम सदस्यों के घरों पर जाते हैं जिनके माता-पिता भाजपा से जुड़े हुए हैं, ताकि वे उन्हें मेरे जिम में आने से रोक सकें." उन्होंने आगे कहा, "इस लक्षित अभियान ने मेरे व्यवसाय को बुरी तरह से अस्थिर कर दिया है."
कोटद्वार के थाना प्रभारी प्रदीप नेगी ने कहा कि पुलिस को इस संबंध में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है.
मार्च में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दीपक कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उपद्रवियों पर हमला करने के आरोपी एक एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी. न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने कोटद्वार के इस जिम मालिक (जो एक तरह से धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी नायक बन चुके हैं) से यह भी कहा था कि चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए वे सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में कोई पोस्ट न करें.

