2025 के भारत को समझने की यह बातचीत सिर्फ बीते साल की समीक्षा नहीं है, बल्कि 2026 और उसके आगे के समय की एक गंभीर चेतावनी भी है. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ प्रोफेसर अपूर्वानंद हिंदू राष्ट्र की अवधारणा, उसके राजनीतिक और सामाजिक अर्थ, और ज़मीन पर उसके असर पर विस्तार से बात करते हैं.
यह चर्चा दिखाती है कि हिंदू राष्ट्र कोई अस्पष्ट नारा नहीं, बल्कि सावरकर और गोलवलकर से लेकर आज तक एक साफ राजनीतिक परियोजना रही है. एक ऐसी परियोजना जिसमें मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य हाशिये के समुदायों को बराबरी के नागरिक अधिकारों से धीरे-धीरे वंचित किया जा रहा है. बातचीत में यह भी सामने आता है कि कैसे कानून का राज कमज़ोर हुआ है, कैसे हिंसा को सामाजिक और राजनीतिक स्वीकृति मिलती जा रही है, और कैसे पुलिस, भीड़ और सत्ता एक ही दिशा में काम करती दिखाई देती हैं.
देहरादून में एंजेल चकमा की हत्या से लेकर अख़लाक़ और हालिया भीड़ हिंसा तक, यह संवाद बताता है कि अब हिंसा को अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बना दिया गया है. अदालतों, पुलिस और राजनीतिक बयानों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं. यह भी चर्चा होती है कि कैसे हत्या के इरादे को सही ठहराया जा रहा है और पीड़ित की पहचान के आधार पर अपराध की गंभीरता तय की जा रही है.
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और विश्वविद्यालयों पर केंद्रित है. प्रोफेसर अपूर्वानंद बताते हैं कि स्कूलों और कॉलेजों को ज्ञान के केंद्रों से बदलकर वैचारिक प्रचार के केंद्र बनाया जा रहा है. जाति, जेंडर और असमानता जैसे विषयों को हाशिये पर धकेला जा रहा है और नई पीढ़ी के सामने इतिहास और वर्तमान की एक मनचाही तस्वीर रखी जा रही है. इसके नतीजे को वह कॉग्निटिव डैमेज यानी सोचने-समझने की क्षमता को नुकसान पहुंचने के रूप में देखते हैं.
यह संवाद इस भ्रम को भी तोड़ता है कि समाज हिंसा से दूर है. धार्मिक जुलूसों, ट्रेनों, कैंपस और सार्वजनिक जगहों पर सामान्य लोग किस तरह नफरत और हिंसा में शामिल हो रहे हैं, इस पर साफ बात होती है. साथ ही यह भी कि यह प्रक्रिया अब सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर और दक्षिण की ओर भी फैल रही है.
आखिर में सवाल उठता है विपक्ष की भूमिका का, प्रतिरोध की संभावनाओं का और समाज की ज़िम्मेदारी का. यह बातचीत बताती है कि यह कोई सामान्य राजनीतिक दौर नहीं है, बल्कि एक तकनीकी फासीवाद है, जिसे समझे बिना उसका मुक़ाबला संभव नहीं. यह वीडियो उन सभी के लिए है जो 2026 और उसके आगे के भारत को लेकर चिंतित हैं और यह समझना चाहते हैं कि हम किस दिशा में जा रहे हैं.
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