मोदी का इक़बाल ख़त्म? | गाली, बग़ावत और छात्र आंदोलन पर अजित साही | #harkara

गाज़ा युद्ध में भारत की भूमिका क्या सिर्फ एक दर्शक की है, या भारत की ओर से इज़राइल को भेजे जा रहे सैन्य शिपमेंट इस संघर्ष में उसकी भूमिका को नया अर्थ देते हैं? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ लेखक, टिप्पणीकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करते हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच भारत से इज़राइल को 2,596 सैन्य शिपमेंट भेजे गए. बातचीत में इन्हीं दावों, भारत-इज़राइल संबंधों, गाज़ा युद्ध, मानवाधिकार, भारत की विदेश नीति और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े अहम सवालों पर चर्चा की गई है. इस वीडियो में जानिए. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है? भारत से इज़राइल को किस तरह की सैन्य सामग्री भेजे जाने की बात कही गई है? क्या इससे भारत की वैश्विक छवि और कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है? वर्ष 2014 के बाद भारत-इज़राइल संबंधों में क्या बदलाव आया? निगरानी, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर क्या सवाल उठ रहे हैं? क्या भारत की विदेश नीति और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बना हुआ है? अगर आपको यह विश्लेषण महत्वपूर्ण लगे तो वीडियो को साझा करें, अपनी राय टिप्पणी में लिखें और हरकारा से जुड़ने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट: https://www.amnesty.org/en/documents/asa20/1327/2026/en/

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क्या भारत गाज़ा युद्ध में सिर्फ दर्शक है, या हथियारों के ज़रिए साझेदार भी? आकार पटेल #harkara