स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत का स्वागत क्यों? | श्रवण गर्ग #harkara

स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत ने जमानत, जेल व्यवस्था और न्यायपालिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. लेकिन क्या इस बहस को सिर्फ एक व्यक्ति की जमानत तक सीमित रखना चाहिए? हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत से आगे भारतीय जेल व्यवस्था, विचाराधीन कैदियों, न्याय तक समान पहुंच और मीडिया के अलग-अलग मामलों में अलग रवैये पर विस्तार से बात की. बातचीत में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुरमीत राम रहीम और बिलकिस बानो मामले जैसे संदर्भों के जरिए यह सवाल उठाया गया कि जेल, जमानत और रिहाई को लेकर समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों दिखाई देती है. साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की 'ऑरवेलियन डिस्टोपिया' वाली टिप्पणी, संस्थागत भरोसे और लोकतंत्र में जनता की भूमिका पर भी चर्चा हुई. क्या स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत को सिर्फ कानूनी घटना के रूप में देखना चाहिए? या इसके जरिए न्याय व्यवस्था, मीडिया और समाज के रवैये को भी परखना चाहिए? श्रवण गर्ग इस पूरे सवाल को एक अलग नजरिए से देखते हैं. पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं. स्वतंत्र भारद्वाज सिर्फ एक चेहरा या बड़ी सियासी प्रवृत्ति? | रीबॉर्न मनीष https://youtu.be/D0hg9AC_zD4 #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #SwatantraBhardwaj #IndianJudiciary #Democracy #CivilLiberties

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स्वतंत्र भारद्वाज सिर्फ एक चेहरा या बड़ी सियासी प्रवृत्ति? | रीबॉर्न मनीष #harkara