यूपी की ‘एक जिला, एक व्यंजन’ सूची में 208 व्यंजनों की पहचान, एक भी मांसाहार नहीं; ‘गलौटी कबाब’ और ‘मुरादाबादी बिरयानी’ नदारद

क्या अब भारतीय व्यंजनों को भी “तुष्टिकरण” का सामना करना पड़ रहा है? ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में मौलश्री सेठ की खबर है कि उत्तरप्रदेश की हाल ही में स्वीकृत ‘एक जिला, एक व्यंजन योजना’ के तहत राज्य भर में 208 विशिष्ट व्यंजनों की पहचान की गई है. हालाँकि, एक बड़ी चूक ने सबका ध्यान खींचा है — इस सूची में एक भी मांस आधारित व्यंजन शामिल नहीं है.

उदाहरण के लिए, लखनऊ के लिए रेवड़ी, चाट, मलाई मक्खन और "आम के उत्पाद" निर्धारित किए गए हैं. वहीं, मुरादाबाद मंडल में दाल के व्यंजन और हांडी हलवा शामिल हैं. इन दोनों क्षेत्रों की प्रसिद्ध विशेषताएं जैसे 'गलौटी कबाब' और 'मुरादाबादी बिरयानी' सूची से नदारद हैं.

इस योजना की शुरुआत सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 जनवरी को 'यूपी दिवस' और 'प्रेरणा स्थल' के उद्घाटन के दौरान लखनऊ में की थी, और 4 मई को राज्य कैबिनेट ने इसे औपचारिक मंजूरी दी.  सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट नोट में 18 मंडलों और 75 जिलों में फैले 208 व्यंजनों को शामिल किया गया है.

खाद्य समीक्षकों ने गलौटी कबाब जैसे प्रतिष्ठित व्यंजनों को बाहर रखे जाने पर सवाल उठाए हैं, जिसे व्यापक रूप से अवधी खान-पान का प्रतिनिधि व्यंजन माना जाता है. लखनऊ के लेखक हिमांशु बाजपेयी, जो दुनिया भर में 'दास्तानगोई' प्रस्तुत करते हैं, ने कहा कि यह चूक आश्चर्यजनक है. "मैं शाकाहारी हूँ, लेकिन जब लोकप्रिय व्यंजनों की सूची तैयार की जाती है, तो दुनिया भर में अपने 'मुंह में घुल जाने वाले' स्वाद के लिए मशहूर गलौटी कबाब का शामिल न होना हैरानी भरा है."

उन्होंने चयन प्रक्रिया पर स्पष्टता की भी मांग की. उन्होंने कहा, "यदि उद्देश्य कम प्रसिद्ध व्यंजनों को बढ़ावा देना है, तो यह समझ में आता है. लेकिन यदि भोजन के चयन में कोई पूर्वाग्रह है, तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए."

चयन के मानदंडों के बारे में पूछे जाने पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि "यह एक लचीली सूची है जिसे जनता की राय और सुझावों के आधार पर अपडेट (अपग्रेड) किया जा सकता है."

उन्होंने आगे बताया कि सभी 75 जिलों में जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति बनाई गई थी, जिसमें शिक्षक, प्रोफेसर और स्थानीय विशेषज्ञ शामिल थे, और उन्हीं ने ये सिफारिशें की थीं. सचान ने कहा, "सर्वेक्षण भी किए गए थे... इन्हीं सिफारिशों के आधार पर यह सूची तय की गई, यह कार्य आसान नहीं था."

मांसाहारी व्यंजनों की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा, “यह जानबूझकर नहीं किया गया है. यदि भविष्य में सिफारिश की जाती है, तो उन्हें जोड़ा जा सकता है. विचार किसी व्यक्तिगत लोकप्रिय वस्तु को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि उन व्यंजनों को बढ़ावा देना है जिससे पैकेजिंग, बिक्री और प्रचार के माध्यम से बड़ी आबादी को लाभ हो.”

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