राज्यों में भाजपा के विस्तार के साथ, देशभर में मुस्लिम विधायकों की संख्या में भारी गिरावट

2014 से देश में भाजपा का बढ़ता वर्चस्व—जिसे पश्चिम बंगाल और असम में इसकी हालिया चुनावी सफलताओं ने और मजबूती दी है—ने भारत के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है. इसका एक प्रत्यक्ष परिणाम राज्य विधानसभाओं में मुस्लिम प्रतिनिधित्व में आई भारी गिरावट है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में ज़ीशान शेख की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम विधायकों की संख्या 2013 में लगभग 339 थी, जो अब घटकर करीब 282 रह गई है.

सबसे अधिक गिरावट बड़े राज्यों में देखी गई है. उत्तर प्रदेश में, मुस्लिम विधायकों की संख्या 63 से घटकर लगभग आधी यानी 31 रह गई है. पश्चिम बंगाल में यह संख्या 59 से गिरकर 37 हो गई है, जबकि बिहार में यह 19 से घटकर 11 पर आ गई है. राजस्थान में भी 11 से घटकर यह संख्या 6 हो गई है.

ये गिरावट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन राज्यों में देश की मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहता है. उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी लगभग 19% है, लेकिन अब उनके पास 8% से भी कम सीटें हैं.  पश्चिम बंगाल में लगभग 27% आबादी के मुकाबले विधायकों में उनकी हिस्सेदारी करीब 12.6% है. बिहार में यह आबादी के लगभग 17% की तुलना में मात्र 4.5% है.

इसी तरह का अंतर अन्य राज्यों में भी दिखाई देता है. असम में मुस्लिम आबादी एक-तिहाई से अधिक है, लेकिन उनके पास लगभग 17% सीटें ही हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक में मुस्लिम विधायकों की हिस्सेदारी लगभग 3-4% है, जो उनकी 10% से अधिक की जनसंख्या हिस्सेदारी से काफी नीचे है.

अपेक्षाकृत उच्च प्रतिनिधित्व वाले राज्यों में भी गिरावट देखी गई है.  केरल में मुस्लिम विधायकों की संख्या 36 से घटकर 34 और कर्नाटक में 11 से घटकर 9 हो गई है. गुजरात में यह संख्या दो से घटकर एक रह गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में अब एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है.

सात राज्य—अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और छत्तीसगढ़—ऐसे हैं जहाँ वर्तमान में कोई भी मुस्लिम विधायक नहीं है.

हालाँकि, कुछ अपवाद भी हैं. तमिलनाडु में मुस्लिम विधायकों की संख्या 8 से बढ़कर 9 हो गई है, जबकि मध्य प्रदेश और मेघालय में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई है. यहाँ तक कि जम्मू और कश्मीर, जहाँ अभी भी मुस्लिम विधायकों की संख्या सबसे अधिक है, वहाँ भी यह संख्या 58 से घटकर 51 हो गई है.

जहाँ तक उन पार्टियों का सवाल है जिनका प्रतिनिधित्व ये मुस्लिम विधायक करते हैं, तो सबसे अधिक कांग्रेस से (61) हैं, उसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (39), और तृणमूल कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी प्रत्येक से 34-34 विधायक हैं.

संयोगवश, भाजपा के पास भी दो मुस्लिम विधायक हैं—मणिपुर से अचब उद्दीन और त्रिपुरा से तफज्जल हुसैन. 

Previous
Previous

यूपी की ‘एक जिला, एक व्यंजन’ सूची में 208 व्यंजनों की पहचान, एक भी मांसाहार नहीं; ‘गलौटी कबाब’ और ‘मुरादाबादी बिरयानी’ नदारद

Next
Next

बंगाल में भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने बंगाली भाषी मुसलमानों के ‘पुश-इन’ के खिलाफ चेताया