श्रवण गर्ग | मोदी जी स्टीयरिंग पर दिखते हैं, पर गाड़ी ड्राइवरलेस है

‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने भारतीय राजनीति में अमित शाह की बढ़ती भूमिका, विपक्ष की चुनौतियों और सत्ता के बदलते स्वरूप पर चर्चा की. बातचीत का केंद्रीय सवाल यह था कि क्या 2024 के बाद भारतीय राजनीति को केवल नरेंद्र मोदी के जरिए समझना पर्याप्त है, या सत्ता का वास्तविक केंद्र कहीं और मौजूद है.

श्रवण गर्ग ने तर्क दिया कि देश में परीक्षा विवादों, जन आंदोलनों, महंगाई, बेरोजगारी और संस्थागत संकट जैसे मुद्दों के बीच विपक्ष अब भी अपनी राजनीति मुख्यतः नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द केंद्रित रखे हुए है. उनके अनुसार सत्ता संचालन का ढांचा अब अधिक व्यापक हो चुका है और अमित शाह उसकी सबसे प्रभावशाली कड़ी के रूप में उभरे हैं. उन्होंने अमित शाह को सरकार का “चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर” बताते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में उनकी भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता.

बातचीत में इंडिया गठबंधन की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के बीच मौजूद मतभेदों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि विपक्ष के सामने केवल चुनावी एकता नहीं, बल्कि एक साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करने की चुनौती है. श्रवण गर्ग का मानना था कि विपक्ष यदि केवल व्यक्तियों के खिलाफ राजनीति करेगा तो वह सत्ता की वास्तविक संरचना को समझने में चूक सकता है.

संवाद में अमित शाह के उस राजनीतिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा हुई, जिसमें भाजपा को लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति की केंद्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने की बात दिखाई देती है. इसके साथ ही संघ, जांच एजेंसियों, चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए. चर्चा के दौरान यह तर्क सामने आया कि भारतीय राजनीति अब केवल सरकार बनाम विपक्ष की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि संस्थागत शक्ति संतुलन की भी बहस बन चुकी है.

बातचीत का बड़ा निष्कर्ष यह रहा कि विपक्ष को अपनी रणनीति नरेंद्र मोदी-केंद्रित राजनीति से आगे ले जाकर बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, आर्थिक संकट और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े सवालों पर केंद्रित करनी होगी. संवाद के अंत में यह सवाल उठाया गया कि क्या भारतीय राजनीति का असली संघर्ष अब किसी एक नेता से नहीं, बल्कि उस व्यापक सत्ता संरचना से है जिसे समझे बिना विपक्ष प्रभावी चुनौती नहीं दे सकता.पूरी बातचीत विडियो यहाँ देख सकते हैं.

Next
Next

81 कार्यक्रम, 53 शहर, 70 दिन: मितव्ययिता की अपील से पहले मोदी का यात्रा कार्यक्रम